इसका असर यह हुआ है कि वर्ष 2025-26 की धान का केवल लगभग 5 प्रतिशत ही मिलिंग हो पाई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 60 प्रतिशत मिलिंग हो चुकी थी।
इसका असर यह हुआ है कि वर्ष 2025-26 की धान का केवल लगभग 5 प्रतिशत ही मिलिंग हो पाई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 60 प्रतिशत मिलिंग हो चुकी थी।
कांग्रेस ने प्रमुख मांगों में केला फसल के लिए बीमा योजना लागू करने, समर्थन मूल्य पर गेहूं-चना की खरीदी तुरंत शुरू करने, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का शत-प्रतिशत मुआवजा देने और उपार्जन केंद्रों की अव्यवस्थाएं सुधारने की बात कही है।
कांग्रेस शहर अध्यक्ष का कहना था कि गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पा रही है, जिससे किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मजबूरी में किसान अपनी उपज कम दामों पर बेचने को विवश हैं और बैंक ऋण चुकाने में असमर्थ होने के कारण डिफॉल्टर होते जा रहे हैं।
किसान संघ ने मांग रखी कि जिला सहकारी बैंकों में ऋण वसूली की अंतिम तिथि 31 मई 2026 तक बढ़ाई जाए। इस वर्ष गेहूं और चने की खरीदी की तारीख कई बार बढ़ने से किसानों को समय पर ऋण चुकाने में दिक्कतें आई हैं और लगभग 80 प्रतिशत किसान डिफॉल्टर हो गए हैं।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि गैस एजेंसियों में कालाबाजारी, पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें और बढ़ती बेरोजगारी ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। मध्यम वर्ग और गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
मुख्य बाजार की सड़कों पर सीवरेज कार्य के चलते कई माह से धूल-गड्ढों की परेशानी झेल रहे लोग, व्यापार पर पड़ रहा असर।
संतों का मानना है कि गौ रक्षा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था भी मजबूत होती है। गौ संरक्षण से गोधन में वृद्धि होगी, जिससे खेती को बल मिलेगा और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
मोर्चा के पदाधिकारियों ने बैठक का आयोजन कर बड़ा आंदोलन करने की रणनीति बनाई। जिसको लेकर नगर में विरोध स्वरूप रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा। वर्षों से लंबित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संगठन द्वारा चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया गया है
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक किलोमीटर में बेहद घटिया निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि इस हिस्से में सामग्री और तकनीक दोनों में लापरवाही बरती गई है