भोपालः मध्य प्रदेश चावल उपभोक्ता महासंघ ने प्रदेश के राइस मिलरों की समस्याओं को लेकर सरकार को चेतावनी दी है। महासंघ का कहना है कि मिलिंग नीति के तहत वर्ष 2024-25 में किए गए वादों, जैसे अपग्रेडेशन राशि और बारदाना भुगतान, के आदेश अब तक जारी नहीं हुए हैं, जिससे मिलर्स की आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई है।
मिलर्स के अनुसार, भुगतान में देरी के कारण वे बैंक डिफॉल्टर बनने की कगार पर हैं और नई धान मिलिंग में रुचि नहीं ले रहे। इसका असर यह हुआ है कि वर्ष 2025-26 की धान का केवल लगभग 5 प्रतिशत ही मिलिंग हो पाई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 60 प्रतिशत मिलिंग हो चुकी थी।
महासंघ ने यह भी चेताया है कि खुले में रखी हजारों करोड़ का धान बारिश में खराब हो सकता है, जिससे सरकार को भारी नुकसान होगा। साथ ही, आने वाले गेहूं उपार्जन सीजन में भंडारण संकट की भी आशंका जताई गई है। मिलर्स ने सरकार से जल्द निर्णय लेकर भुगतान और नीतिगत स्पष्टता देने की मांग की है, ताकि उद्योग को डूबने से बचाया जा सके।
भोपाल से संवाददाता सुनील मालवीय की रिपोर्ट