मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित आईपीएस सर्विस मीट के शुभारंभ अवसर पर कहा कि सभी विभागों का अपना-अपना महत्व है, लेकिन पुलिस विभाग का महत्व सबसे अलग और विशिष्ट है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी न केवल ड्यूटी की कठिन जिम्मेदारियां निभाते हैं, बल्कि पारिवारिक चुनौतियों के बीच भी पूरे उत्साह, उमंग और अनुशासन के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसा अनुशासन और समर्पण केवल पुलिस बल में ही देखने को मिलता है। पुलिसकर्मी हर परिस्थिति में राज्य और समाज की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं, यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय ऐसा माना जाता था कि मध्यप्रदेश में नक्सल मूवमेंट का पूरी तरह समाप्त होना असंभव है, लेकिन प्रदेश पुलिस और पुलिस अधिकारियों ने इस चुनौती को गंभीरता से समझा और अपने साहस, रणनीति व समन्वय से नक्सल मूवमेंट को पूरी तरह समाप्त कर असंभव को संभव बना दिया।उन्होंने इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ी उपलब्धि बताते हुए सभी पुलिस अधिकारियों और जवानों को इस सफलता के लिए हार्दिक बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश पुलिस आज देश के सामने एक आदर्श मॉडल के रूप में कार्य कर रही है। सतर्कता, त्वरित कार्रवाई और तकनीक के बेहतर उपयोग से राष्ट्रविरोधी ताकतों को जड़ से समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में संगठित अपराध के लिए कोई स्थान नहीं है। मध्यप्रदेश पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि अपराधी स्वयं कानून के शिकंजे में आएं और किसी को भी प्रदेश में अशांति फैलाने का अवसर न मिले।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- “स्पष्ट संदेश है कि मध्यप्रदेश पुलिस स्वयं अपराधियों को दबोच ले, ताकि किसी भी तरह से राज्य की शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को नुकसान न पहुंचे।” आईपीएस सर्विस मीट में मुख्यमंत्री के इस संबोधन ने पुलिस बल का मनोबल बढ़ाया और प्रदेश में सुशासन, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को एक बार फिर स्पष्ट किया।