सिंगरौलीः एनटीपीसी विंध्याचल के शाहपुर ऐश डाइक से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में राख (ऐश) से भरे वाहन निकल रहे हैं, जहां परिवहन में तय नियमों का खुलकर उल्लंघन किया जा रहा है। कई वाहनों में राख को ठीक से ढका नहीं जाता, यहां तक कि कुछ गाड़ियों में (तिरपाल) भी सही तरीके से नहीं लगा होता। इसका नतीजा यह है कि सड़कों पर चलते-चलते राख गिरती रहती है और पूरे रास्ते में फैल जाती है।

एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से दावा किया जाता है कि ऐश डाइक से निकलने वाले वाहनों की वॉशिंग की जाती है और उन्हें पूरी तरह ढककर भेजा जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। यदि सही तरीके से वॉशिंग और कवरिंग हो रही है, तो फिर सड़कों पर इतनी मात्रा में राख कैसे फैल रही है? यह बड़ा सवाल बन गया है।
राख से परिवहन मार्ग की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। सड़क के दोनों किनारों पर मोटी परत में राख जमी रहती है, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिन में कभी-कभार पानी का छिड़काव हो जाता है, लेकिन शाम होते ही हालात और भी खराब हो जाते हैं। धूल इतना बढ़ जाता है कि सड़क पर चलना तक मुश्किल हो जाता है।
इस पूरे मामले में राख उपयोगिता विभाग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रांसपोर्टरों और अधिकारियों के बीच मिलीभगत के चलते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को फोन के माध्यम से शिकायत भी की गई, लेकिन इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सिंगरौली से संवाददाता अमित पाण्डेय की रिपोर्ट