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जानें कैसे पश्चिम बंगाल से असम तक बिगड़ा AIMIM का चुनावी गणित, फिरेगा उम्मीदों पर पानी

By: Amit ranjan 
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जानें कैसे पश्चिम बंगाल से असम तक बिगड़ा AIMIM का चुनावी गणित, फिरेगा उम्मीदों पर पानी

नई दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव में 5 सीटें हासिल करने वाली AIMIM अब पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में भी अपना हाथ अजमा रही है। जिसे लेकर उसने तैयारी भी शुरू कर दी है। लेकिन इस तैयारी को पूरी होने से पहले ही AIMIM के सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। और उनकी वो सभी चुनावी गणित बिगड़ गई है, जिसे उन्होंने चुनाव से पहले ही तैयार कर रखा था।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में होने वाले चुनाव का ऐलान कर दिया है। लेकिन अभी तक AIMIM ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि, AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि वह सही वक्त पर रणनीति का खुलासा करेंगे। आपको बता दें कि बिहार चुनाव में करिश्माई प्रदर्शन के बाद AIMIM को सबसे अधिक उम्मीद पश्चिम बंगाल में थी। क्योंकि वहां करीब तीस फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। इनमें ज्यादातर बंगलाभाषी मुस्लिम है। ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी के इंडियन सेकुलर फ्रंट के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल में एंट्री करना चाहते थे, पर उससे पहले ही आईएसएफ ने कांग्रेस-लेफ्ट के साथ गठबंधन कर लिया।

आईएसएफ के इस फैसले ने AIMIM की चुनाव रणनीति बिगाड़ दी है। क्योकि जल्द ही चुनाव शुरू होने है, ऐसे में AIMIM के पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं बचा है। अगर ओवैसी पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं, तो उन्हें ज्यादा समर्थन मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि बंगाल में हिन्दी या ऊर्दू भाषी मुस्लिम की संख्या बेहद कम है। जबकि चुनाव में भाजपा का प्रचार बेहद आक्रामक है, ऐसे में मुस्लिम मतदाता एकजुट होकर वोट कर सकते हैं।

वहीं अगर हम असम की बात करें तो, असम में मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF चुनावी मैदान में है। वहीं ओवैसी पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वह असम में चुनाव नहीं लड़ेंगे। केरल में भी इंडियन यूनियम मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) है और उसका काफी असर है। ऐसे में ओवैसी के पास केरल में भी विकल्प सीमित हैं।

पश्चिम बंगाल में आईएसएफ के कांग्रेस-लेफ्ट के साथ जाने के बाद लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तमिलनाडु में चुनाव लड़ने का ऐलान किया। आपको बता दें कि तमिलनाडु में AIMIM ने पिछले विधानसभा चुनाव में भी दो सीटों पर किस्मत आजमाई थी। लेकिन उन्हें दस हजार वोट भी नहीं मिले। बता दें कि तमिलनाडु में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब छह फीसदी है। केरल में आईयूएमल तमिलनाडु में कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के साथ चुनाव लड़ती है। पिछले चुनाव में आईयूएमएल ने पांच सीट पर चुनाव लड़ा और एक सीट जीती थी। ऐसे में तमिलनाडु में भी ज्यादा गुंजाइश नहीं है।

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