अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ लगाने से भारत के 48 अरब डॉलर से अधिक के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है। इसमें टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, चमड़ा, जूते, रसायन और मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि, भारत ने इस चुनौती को अवसर में बदलने की ठोस रणनीति तैयार कर ली है।
भारत सरकार और निर्यात संवर्धन परिषद (EPC) ने 40 देशों में विशेष आउटरीच कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। इनमें यूके, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, कनाडा, मैक्सिको, रूस, तुर्की, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं। इन देशों का वैश्विक टेक्सटाइल एवं परिधान आयात बाजार 590 अरब डॉलर से अधिक का है, जबकि भारत की हिस्सेदारी अभी केवल 5-6% है।
भारत का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण, टिकाऊ और इनोवेटिव टेक्सटाइल उत्पादों के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना है। वर्तमान में भारत का टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र 179 अरब डॉलर का है, जिसमें 142 अरब डॉलर घरेलू बाजार और 37 अरब डॉलर निर्यात से आता है। वैश्विक स्तर पर भारत 4.1% हिस्सेदारी के साथ छठा सबसे बड़ा निर्यातक है।
EPC इस रणनीति का मुख्य आधार होगा, जो लक्षित बाजारों की मांग का विश्लेषण करेगा, उच्च मांग वाले उत्पादों की पहचान करेगा और सूरत, पानीपत, तिरुपुर, भदोही जैसे उत्पादन केंद्रों को नए अवसरों से जोड़ेगा। मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और चल रही व्यापार वार्ताएं भी भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति न केवल अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बनाएगी। अमेरिका भी भारत की इस त्वरित प्रतिक्रिया से आश्चर्यचकित है।
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी देश को अपनी नीतियों पर हावी नहीं होने देगा। यह योजना भारत की आर्थिक लचीलापन और वैश्विक व्यापार चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को दर्शाती है। आने वाले समय में भारत की यह रणनीति न केवल अमेरिकी टैरिफ के खतरे को कम करेगी, बल्कि वैश्विक निर्यात में उसकी हिस्सेदारी को भी बढ़ाएगी।