शाजापुर जिला अस्पताल परिसर में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिले के 154 संविदा स्वास्थ्य कर्मी 2 जून से धरने पर बैठे हुए हैं। आंदोलन के कारण स्वास्थ्य विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे आम नागरिकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि वे सरकार से कोई नई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि पहले से घोषित और स्वीकृत सुविधाओं के क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में संविदा नीति 2023 के तहत राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और स्वास्थ्य बीमा का लाभ प्रदान करना, वेतन विसंगतियों को दूर करना तथा 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि सहित अन्य लंबित लाभों को लागू करना शामिल है।

आंदोलन के चलते स्वास्थ्य विभाग का नियमित कामकाज प्रभावित हुआ है। जन्म प्रमाण पत्र बनवाने, सीएम हेल्पलाइन से जुड़े मामलों के निराकरण तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को बिना काम हुए वापस लौटना पड़ रहा है। अस्पताल और विभागीय कार्यालयों में कार्यों की गति धीमी पड़ गई है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

धरने पर बैठे कर्मियों का कहना है कि पिछले सात दिनों से वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक प्रशासन या सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा।
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही तो वे भोपाल पहुंचकर प्रदेश स्तरीय बड़ा प्रदर्शन करेंगे। वहीं आम नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों की हड़ताल से व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं और इसका सीधा असर जनता पर पड़ रहा है।
अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की मांगों पर कब तक निर्णय लिया जाता है और स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य स्थिति में लौट पाती हैं या नहीं।