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103 साल की उम्र में इस गांधीवादी ने दी कोरोना को मात, ले चुके हैं भारत छोड़ो आंदोलन में भाग

By: Amit ranjan 
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103 साल की उम्र में इस गांधीवादी ने दी कोरोना को मात, ले चुके हैं भारत छोड़ो आंदोलन में भाग

नई दिल्ली : देश में जारी कोरोना संकट के बीच हर कोई कोरोना से त्रस्त है, और जल्द ही इस महामारी से छुटकारा पाने के लिए दिन रात भगवान से प्रार्थना कर रहे है। एक तरफ जहां पिछले कुछ दिनों में कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है, तो वहीं दूसरी ओर इस महामारी से मरने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। इसी बीच एक ऐसी खबर आई है, जिसने एक बार फिर लोगों को इस महामारी से लड़ने को प्रेरित किया है।

आपको बता दें कि देश के जाने-माने गांधीवादी और स्वतंत्र सेनानी एच एस दोरैस्वामी ने 103 साल की उम्र में कोविड से लड़ाई जीत ली है और वह घर लौट रहे हैं। बुजुर्ग दोरैस्वामी ने बुधवार को कहा कि, “ मुझे पांच दिन पहले लक्षण दिखे लेकिन कोई जटिलता नहीं हुई। फिर भी मैंने अस्पताल में भर्ती होने का निर्णय किया, क्योंकि मुझे श्वास – प्रणाली की समस्या है।”

दोरैस्वामी के मुताबिक, वह सरकार के स्वामित्व वाले स्वायत्त अस्पताल, ‘जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवास्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च’ में भर्ती हुए थे।

उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि जयदेव इंस्टीट्यूट के निदेशक, जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के दामाद डॉ सीएन मंजूनाथ उनके इलाज की निजी तौर पर निगरानी कर रहे थे। बता दें कि दोरैस्वामी ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया था और 1943 से 1944 तक 14 महीने जेल में रहे थे। गांधीवादी ने मैसूरू चलो आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। जिस आंदोलन के कारण मैसूरू के महाराज को आज़ादी के बाद अपनी रियासत का भारतीय संघ में विलय करना पड़ा था।

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