पन्ना: जनपद पंचायत पन्ना अंतर्गत ग्राम पंचायत तारा में स्वच्छता अभियान की हकीकत ग्रामीणों के आरोपों के बाद सवालों के घेरे में आ गई है। सरकार गांवों को स्वच्छ बनाने के दावे कर रही है, लेकिन तारा पंचायत में गलियों में फैली गंदगी, जाम नालियां और सड़कों पर बहता गंदा पानी इन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत द्वारा सफाई कार्य के नाम पर 17 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक की राशि निकाली गई, लेकिन धरातल पर सफाई का कोई काम दिखाई नहीं देता। नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं, बरसात में गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और गांव के लोगों का निकलना तक मुश्किल हो गया है। बदबू और जलभराव से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच बैजनाथ कुशवाहा पर पहले भी अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो जांच की और न ही मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखी। इससे पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि सफाई पर हजारों रुपये खर्च किए गए हैं, तो गांव आज भी गंदगी से क्यों जूझ रहा है? आखिर सरकारी राशि खर्च कहां हुई? क्या केवल कागज़ों में सफाई दिखाकर भुगतान कर दिया गया?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत पन्ना से मांग की है कि स्वच्छता मद से निकाली गई राशि की निष्पक्ष जांच, भौतिक सत्यापन और वित्तीय ऑडिट कराया जाए। यदि अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लग सके। सवाल यह है कि जब कागज़ों में सफाई हो चुकी है, तो तारा ग्राम पंचायत आज भी गंदगी में क्यों डूबी हुई है? अब इसका जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।
पन्ना से राजेश रावत की रिपोर्ट