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उज्जैन में 10वीं शताब्दी का प्राचीन मंदिर और कई शिवलिंग मिले, पुरातत्व विभाग ने किया बड़ा खुलासा

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान खुदाई में 10वीं शताब्दी के परमारकालीन शैली के प्राचीन मंदिर के अवशेष और 6 शिवलिंग मिले हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार एक शिवलिंग 14वीं शताब्दी का भी है। विशेषज्ञों की टीम ने स्थल का निरीक्षण कर अध्ययन शुरू कर दिया है और मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य जारी है। इन ऐतिहासिक खोजों को संग्रहालय या पुनर्निर्मित मंदिर में संरक्षित किया जाएगा।

By: Nivedita 
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उज्जैन में 10वीं शताब्दी का प्राचीन मंदिर और कई शिवलिंग मिले, पुरातत्व विभाग ने किया बड़ा खुलासा

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर और महाकाल लोक क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान खुदाई में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष सामने आए हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार यहां 10वीं शताब्दी के परमारकालीन शैली के प्राचीन मंदिर की संरचना और कई शिवलिंग प्राप्त हुए हैं।

खुदाई में सामने आई प्राचीन मंदिर संरचना

निर्माण कार्य के दौरान मिली इस संरचना का अध्ययन करने के लिए भोपाल से पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम उज्जैन पहुंची। जांच में यह मंदिर परमारकालीन स्थापत्य शैली का पाया गया, जिसे लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जा रहा है।

पुनर्निर्माण कार्य जारी, 30 प्रतिशत काम पूरा

त्रिवेणी संग्रहालय एवं पुरातत्व विभाग के अनुसार प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। करीब 30 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे मूल स्थापत्य शैली में ही विकसित किया जा रहा है, ताकि ऐतिहासिक स्वरूप संरक्षित रह सके।

खुदाई में मिले 6 प्राचीन शिवलिंग

खुदाई के दौरान अब तक कुल 6 शिवलिंग मिले हैं, जिनमें से एक शिवलिंग 14वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। विशेष बात यह है कि यह शिवलिंग तीनों हिस्सों में सुरक्षित अवस्था में प्राप्त हुआ है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

संरक्षण और संग्रहालय में रखने की योजना

पुरातत्व विभाग के अनुसार प्राप्त सभी अवशेषों को या तो पुनर्निर्मित मंदिर में स्थापित किया जाएगा या फिर संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक धरोहर को देख और समझ सकें।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण खोज

विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राचीन उज्जैन और परमारकालीन वास्तुकला के अध्ययन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

 

 

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