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उज्जैन में 13 साल बाद बना महासंयोग, शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब

उज्जैन में 13 साल बाद शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या के दुर्लभ महासंयोग पर त्रिवेणी स्थित नवग्रह शनि मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही शिप्रा घाटों पर स्नान के बाद भक्तों ने भगवान शनिदेव के दर्शन किए और “जय शनिदेव” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया तथा प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए। नर्मदा जल से फव्वारा स्नान की व्यवस्था भी की गई, जबकि 24 घंटे तेल अर्पण और शाम को महाआरती व भंडारे का आयोजन प्रस्तावित है।

By: Nivedita 
Updated:
उज्जैन में 13 साल बाद बना महासंयोग, शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब

धर्मनगरी उज्जैन में 13 साल बाद बने दुर्लभ महासंयोग के चलते शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या एक ही दिन मनाई गई, जिससे शहर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। उज्जैन के त्रिवेणी स्थित प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे और सुबह से ही शिप्रा घाटों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे क्षेत्र में “जय शनिदेव” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजन से शुरू हुआ दिन

मंदिर के पट खुलते ही तड़के विशेष पूजन, पंचामृत अभिषेक और दर्शन का क्रम शुरू हुआ। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने पहले शिप्रा नदी में स्नान किया और फिर कतारों में लगकर भगवान शनिदेव के दर्शन किए। महासंयोग के कारण मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला।

फूलों और रोशनी से सजा मंदिर परिसर

विशेष अवसर को देखते हुए मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया गया था। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए।

नर्मदा जल से फव्वारा स्नान की व्यवस्था

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के चलते शिप्रा नदी के जलस्तर में कमी के कारण प्रशासन ने नर्मदा जल से फव्वारा स्नान की विशेष व्यवस्था की। श्रद्धालु फव्वारों के नीचे स्नान कर भगवान शनिदेव के दर्शन के लिए पहुंचे, जिससे व्यवस्था को और सुगम बनाया गया।

24 घंटे जारी रहेगा तेल अर्पण का क्रम

मंदिर के महंत राकेश बैरागी ने बताया कि इस विशेष दिन पर 24 घंटे तक तेल अर्पण का क्रम जारी रहेगा। मान्यता है कि इस दिन शनिदेव को तेल, काला तिल, नारियल और काले वस्त्र अर्पित करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम

भीड़ को देखते हुए पुलिस, होमगार्ड, SDRF और प्रशासनिक दल तैनात किए गए हैं। पार्किंग, पेयजल, मेडिकल और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

शाम को होगी महाआरती और भंडारा

शाम के समय मंदिर में महाआरती और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। पूरा उज्जैन क्षेत्र इस धार्मिक आयोजन के कारण भक्ति और आस्था से सराबोर नजर आ रहा है।

 

 

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