देश के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के आज 150 वर्ष पूरे हुए हैं। 7 नवंबर 1875 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा के रूप में जाना जाता है। यह केवल एक गीत या कविता नहीं, बल्कि भारत की एकता, त्याग, मातृभूमि के प्रति समर्पण और भावनात्मक जुड़ाव का जीवंत प्रतीक है। उस समय यह गीत अंग्रेजी शासन के विरुद्ध खड़े होने और स्वतंत्रता की चेतना जगाने में सबसे प्रभावशाली प्रेरणा स्रोत बना।
अमित शाह का संदेश और स्मरण वर्ष की घोषणा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर इसे राष्ट्रभक्ति की अमर ज्योति बताया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना प्रज्वलित करता है। इस गीत के रचनाकाल 7 नवंबर 1875 से लेकर अगले एक वर्ष यानी 7 नवंबर 2026 तक इसे विशेष स्मरण वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान पूरे देश में जागरूकता कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और शैक्षणिक चर्चाएं आयोजित की जाएंगी ताकि नई पीढ़ी इस गीत के महत्व को समझ सके।
गीत की रचना, प्रकाशन और संगीतबद्ध स्वरूप
सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, वंदे मातरम को पहली बार ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया था। बाद में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया। इस गीत को महान कवि और संगीतकार रवींद्रनाथ टैगोर ने स्वरबद्ध किया, जिससे यह और अधिक लोकप्रिय हुआ। स्वतंत्रता संग्राम के समय यह गीत क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना और ‘वंदे मातरम’ का स्वर राष्ट्रगान की तरह पूरे देश में गूंजा।
आज भी जीवंत है वंदे मातरम की भावना
अमित शाह ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार और समाज के साथ वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण गायें, ताकि यह राष्ट्रभक्ति का संदेश भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचता रहे। वंदे मातरम आज भी देश की सांस्कृतिक, राजनीतिक और राष्ट्रीय चेतना का अविभाज्य प्रतीक है।