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शिवा बाबा ट्रस्ट पर दान राशि में गड़बड़ी के आरोप, ग्रामीणों ने मांगी जांच

बुरहानपुर जिले के गंभीरपुरा स्थित शिवा बाबा बंजारा समाज समिति ट्रस्ट पर ग्रामीणों ने करोड़ों रुपये की दान राशि में गड़बड़ी और आर्थिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पिछले 30 वर्षों से ट्रस्ट पर एक ही परिवार का कब्जा है और मेले की वास्तविक आय से कम रकम रिकॉर्ड में दिखाई जाती है। दान पेटियों की गिनती बिना CCTV के होने, सुविधाओं की कमी और सरकारी जमीन के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मामले में ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि ट्रस्ट अध्यक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।

By: Nivedita 
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शिवा बाबा ट्रस्ट पर दान राशि में गड़बड़ी के आरोप, ग्रामीणों ने मांगी जांच

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के ग्राम गंभीरपुरा स्थित शिवा बाबा बंजारा समाज समिति ट्रस्ट एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। ग्रामीणों ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर करोड़ों रुपये की दान राशि में गड़बड़ी, आर्थिक अनियमितताओं और लंबे समय से मनमानी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम और तहसीलदार नेपानगर को लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

30 साल से एक ही परिवार का कब्जा होने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब तीन दशकों से ट्रस्ट का संचालन एक ही परिवार के हाथों में है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समाज के अन्य लोगों को ट्रस्ट की सदस्यता और निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा जाता है। ग्रामीण अजीत पवार ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में पारदर्शिता की कमी है और आम समाजजनों को अधिकार नहीं दिए जा रहे।

मेले की आय और रिकॉर्ड में बड़ा अंतर

ग्रामीण दशरथ पवार के अनुसार शिवा बाबा मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और भारी मात्रा में नकद चढ़ावा आता है। आरोप है कि वास्तविक आय लगभग 40 लाख रुपये तक होती है, लेकिन रिकॉर्ड में केवल 15 लाख रुपये ही दर्शाए जाते हैं। इससे दान राशि के उपयोग और हिसाब-किताब पर सवाल खड़े हो गए हैं।

दान पेटियों की गिनती पर उठे सवाल

ग्रामीण महिला सुषमा बाई ने आरोप लगाया कि दान पेटी, नकद चढ़ावा, सोना-चांदी और दुकानों से होने वाली आय का सही विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता। वहीं त्रिलोक नायक का कहना है कि दान पेटियों की गिनती बंद कमरों में बिना CCTV निगरानी के की जाती है, जिससे गड़बड़ी की आशंका बढ़ जाती है।

श्रद्धालुओं को सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि दुकानों और पार्किंग से भारी वसूली के बावजूद श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। शिकायत में पानी, शौचालय और सुरक्षा व्यवस्था की कमी का मुद्दा भी उठाया गया है। साथ ही सरकारी जमीन के व्यावसायिक उपयोग और विरोध करने वालों को धमकाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा

मामले पर एसडीएम भागीरथ वाखला ने बताया कि यह प्रकरण पिछले एक वर्ष से एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं ट्रस्ट अध्यक्ष रूपसिंह पवार ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और गलत बताया है।

गांव में बढ़ा आक्रोश

लगातार सामने आ रहे आरोपों के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रस्ट की आय और खर्च का सार्वजनिक ऑडिट कराया जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

 

 

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