इन दिनों यस बैंक आर्थिक संकट से जूझ रहा है, इस वजह से बैंक के शेयर में तेजी से गिरावट आई है। बैंक के शेयरों में 85 फीसदी की गिरावट आई है। आरबीआई ने बैंक से पैसे निकासी की सीमा 50 हजार रुपए निर्धारित कर दी है। साथ ही बैंक की मैनेजमेंट टीम को भंग कर बैंक को संकट से बाहर निकालने की जिम्मेदारी SBI के पूर्व सीएफओ प्रशांत कुमार को दी गई है। इस बीच ईडी बैंक के संस्थापक राणा कपूर से पूछताथ करने के लिए कार्यालय लाई है। शुक्रवार को ईडी ने मुंबई में स्थित उनके आवास पर छापेमारी की थी।
ईडी ने राणा कपूर के घर सहित कई ठिकानों पर शुक्रवार को छापेमारी की थी। ईडी की टीम ने कपूर से उनके आवास पर भी पूछताछ की थी और राणा के खिलाफ लुकआउट नेटिस भी जारी किया था। अधिकारियों का कहना है कि, उनके खिलाफ यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के संबंध में की गई है।
ईडी ने उनके व अन्य के खिलाफ प्रवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों की माने तो इस छापे की कार्रवाई का मकसद और साक्ष्यों को जुटाना है। केंद्रीय एजेंसी एक कारपोरेट कंपनी को बैंक द्वारा लोन देने और इसके बदले में पत्नी के बांक खातों में रिश्वत लेने के संबंध में राणा की भूमिका की जांच कर रही है।
कपूर के खिलाफ दर्ज मामले का संबंध डीएचएफएल जांच से भी जुड़ा है। बैंक से डीएचएफएल ज्वारा लिया गया एपीए करारा दिया गया था। इसके साथ ही कुछ अन्य अनियमितताएं भी एजेंसी की जांच के दायरे में हैं।
वहीं, शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि, हमारी सरकार भरोसा दिलाती है कि जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित रहेगा। मैं आरबीआई से गुजारिश करती हूं कि वह कानून के मुताबिक इस मामले की गंभीरता और महत्व को समझते हुए ऐसा रास्ता निकाले जिससे लोगों की परेशानियां कम हों।
उन्होंने कहा कि, यस बैंक के कर्मचारियों की नौकरी, वेतन एक साल तक सुरक्षित हैं, जमाएं और देनदारियां अप्रभावित रहेंगी। आरबीआई पता लगाएगा कि यस बैंक में क्या गलत हुआ। इसमें व्यक्तिगत भूमिका का पता लगाना होगा।