{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }
सत्य को झूठ में बदलना बहुत आसान है, कलियुग का प्रारंभ ही इसका प्रचार प्रसार करने के लिए किया गया है। आज कल झूठ का प्रचार तो कई बड़ी बड़ी कंपनी भी करते है। उदाहरण के लिए आप मोबाइल को ही ले लीजिये, पहले लोग एक दूसरे से सीधे मिलने जा सकते थे। चिठ्ठी भेजी जाती थी लेकिन मोबाइल आने के बाद आपके पास अगर किसी का कॉल आता है की आपसे मिलना है तो आप अगर उससे मिलना नहीं चाहते तो बड़ी आसानी से कह देते है की मैं घर पर नहीं हूँ।
आप सोचिये की एक माध्यम से कैसे कितनी आसानी से आपने झूठ बोल दिया ! कई बार तो आपने बच्चे को कह दिया की जाओ फ़ोन उठाकर कहो की मैं घर पर नहीं हूँ ! सोचिये आपने एक अबोध बालक से कैसे आसानी से झूठ बुलवा दिया। कलयुग तो चाहता ही यह है कि हर व्यक्ति एक दूसरे से झूठ बोले। आज कल तो आतंकवादियों की भी लोगों से मदद मिल जाती है। इंटरनेट के ज़रिये उनके खातों में पैसे भेज दिए जाते है।

आज के इस समय में ऐसा कोई भी विभाग नहीं है जहां कोई झूठ नहीं बोलता है। शिक्षा के मंदिर स्कूल में भी आज कल तो बच्चे झूठ बोलने लगे है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ? सोचिये की आपके बच्चे ने आपकी जेब से कुछ पैसे चुरा लिए तो आप अपने बच्चे से पूछते है की तुमने ऐसा क्यों किया और आपका बच्चा आपसे झूठ कहता है की उसने नहीं किया और आप उसे मारते है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप भी तो झूठ बोलते है।
जब आपके पूर्वज कहकर गए है की सांच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप ! उसके बाद भी अक्सर लोग झूठ कहते है। पिता पुत्र से, पत्नी पति से। ये सब कलियुग का ही प्रभाव है जहां गुरु और शिष्य में भी आज कल सत्य का अभाव हो गया है। आने वाले समय में तो और भी मशीनों का अविष्कार होगा और सत्य को लगभग खत्म ही कर दिया जाएगा।