मेडिकल भाषा में खाते समय पसीना आने की समस्या को गस्टेटरी स्वेटिंग (Gustatory Sweating) कहा जाता है। यह स्थिति तब होती है जब खाना खाते समय शरीर की नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाती है और पसीना निकलने लगता है।
मेडिकल भाषा में खाते समय पसीना आने की समस्या को गस्टेटरी स्वेटिंग (Gustatory Sweating) कहा जाता है। यह स्थिति तब होती है जब खाना खाते समय शरीर की नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाती है और पसीना निकलने लगता है।
सामान्य भूल या गंभीर समस्या? समझना है ज़रूरी...
देश में लगभग 5 करोड़ 70 लाख से ज्यादा लोग फंगल से होने वाली गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें 10 प्रतिशत अर्थात करीब साठ लाख लोगों को ऐसी बीमारियां हैं जिनसे मौत भी हो सकती है।
जब भी किसी व्यक्ति को छोटी-मोटी चोट लग जाती है, तो उसे बैंडेज लगा दिया जाता है। इसे लगाने से छोटी चोंटों से छुटकारा मिल जाता है। आमतौर पर हर घर में एक फर्स्ट एड बॉक्स तो जरुर होता है और उसमें बैंडेज भी मिल ही जाएगी। ये किसी फैमिली मेंबर से कम नहीं है। क्योंकि सालों से लोग बैंडेज का उपयोग अपनी चोट को ठीक करने के लिए करते
मॉनसून के आगमन का इंतजार तो हर किसी को होता है। किसी के लिए मॉनसून का अनुभव अच्छा होता है तो किसी के लिए परेशानियों से भरा हुआ। मॉनसून में जहां एक तरफ जल भराव की वजह से बाढ़ के हालात बन जाते हैं। वहीं दूसरी ओर बारिश के इस मौसम ने लोगों में आई फ्यू जैसे बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है।
आजकल लोगों में नाखून चबाने की आदत काफी सामान्य हो गई है और आमतौर पर यह आदत बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है। अक्सर हमनें लोगों को नाखूनों चबाते हुए देखा ही होगा ।लोग ऐसा तब करते हैं जब वह किसी चीज को लेकर काफी ज्यादा चिंतित होते है। नाखून चबाने की आदत का आपके दांतों के साथ-साथ आपके स्वास्थय पर भी काफी बुरा असर पड़ सकता
कोरोना जैसी महामारी की दहशत को लोग अभी पूरी तरह से भूल भी नही पाए थे कि गुजरात से उपजे एक नए वायरस ने दस्तक दे दी है। इस वायरस को चांदीपुरा वायरस नाम दिया गया है और यह वायरस बच्चों के लिए घातक साबित हो रहा है।
बात करे बी.पी यानी ब्लड़ प्रेशर की,जब बल्ड प्रेशर का लेवल सामान्य से अधिक हो जाता है,तब आप डायबिटीज का शिकार हो जाते है।यह एक बेहत खतरनाक बीमारी मानी जाती है,क्योंकि इसे कंट्रोल तो किया जा सकता है परन्तु इसका ईलाज संभव नही है।
आज के समय में डायाबिटीज की समस्या घरों में आम-सी बन गई है। यह एक ऐसी समस्या है जो कि इंसान के भीतर रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अधिक होने से होती है।