पन्ना टाइगर रिजर्व से वर्ष 2003 से 2007 के बीच विस्थापित किए गए लगभग 200 परिवार आज भी अपने भू-अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पीपरटोला, सूरजपुरा और कनारी गांव के इन परिवारों को पुनर्वास के तहत पन्ना के पुखरा गांव के पास बसाया गया था, जहां उन्हें 2-2 हेक्टेयर वनभूमि के पट्टे दिए गए थे।
ग्रामीणों को उस समय आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही वनभूमि को राजस्व भूमि में परिवर्तित कर राजस्व पट्टे जारी किए जाएंगे, लेकिन दो दशक बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। वन और राजस्व विभाग के बीच समन्वय की कमी के चलते मामला लंबित बना हुआ है।
राजस्व पट्टे नहीं मिलने के कारण ग्रामीण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, खाद-बीज अनुदान और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है और मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि 16 किसानों को अब तक न तो पूरी तरह भूमि का सीमांकन मिला है और न ही उनका अधिकार सुनिश्चित हो पाया है। वहीं कई बुजुर्ग इस समस्या के समाधान की प्रतीक्षा करते-करते इस दुनिया से भी चले गए।
नाराज ग्रामीणों ने पन्ना कलेक्टर और पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द राजस्व पट्टे जारी करने और इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।