पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सियासी संकट तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर देखने को मिल रहा है। पार्टी के अंदर बगावत खुलकर सामने आ गई है और हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब “असली TMC कौन है?” इसको लेकर सीधा विवाद खड़ा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कई असंतुष्ट और बागी विधायक अब खुलकर मोर्चा खोल चुके हैं। ये विधायक विधानसभा पहुंचकर स्पीकर को पत्र सौंपने की तैयारी में हैं, जिसमें वे अपने गुट को ही असली TMC के रूप में मान्यता देने की मांग कर सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि बागी गुट को करीब 50 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो TMC में बड़ी टूट लगभग तय मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, असंतुष्ट नेता एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की तैयारी भी कर रहे हैं। इससे ममता बनर्जी की नेतृत्व क्षमता और पार्टी की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि असंतुष्ट विधायक जल्द ही एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि करीब 54 विधायकों का समर्थन उन्हें प्राप्त है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
मानिकतला के विधायक तपस रॉय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रही TMC अब राज्य के राजनीतिक परिदृश्य से कमजोर होती नजर आ सकती है। हालांकि, पार्टी के अन्य नेताओं का कहना है कि अधिकतर विधायक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं।
इस राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सख्त रुख अपनाया है। ममता बनर्जी ने मंगलवार (2 मई) को मध्य कोलकाता में धरना दिया था। यह धरना पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों और राजनीतिक हिंसा के विरोध में किया गया था। धरने के दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि TMC को तोड़ने की साजिश की जा रही है।
ममता बनर्जी लगातार यह आरोप लगा रही हैं कि पार्टी को कमजोर करने के लिए पैसों, दबाव और राजनीतिक रणनीति का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार दिया है।
हालांकि दूसरी तरफ पार्टी के भीतर ही कई नेता असंतोष जता चुके हैं। कुछ विधायकों की बैठकों में अनुपस्थिति और अलग-अलग गुटों की सक्रियता ने TMC संगठन की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो TMC में बड़ी टूट संभव है। वहीं, पार्टी का आधिकारिक रुख है कि अधिकतर विधायक अभी भी ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं।