देश का चौथा सबसे बड़ा निजी बैंक संकट में है, उसके मालिक राणा कपूर को गिरफ्तार किया गया है वही उनकी बेटियों से पूछताछ जारी है। अगर देखे तो यह बैंक अपने ही खाताधारकों के कारण डूबने की कगार पर है। दरअसल देशभर में येस बैंक की 1120 शाखाएं और 1450 एटीएम हैं। येस बैंक में 21 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।
इस वक़्त बैंक के कर्मचारियों पर एक संकट पैदा हो गया है और वो हुआ है उन बड़े लोगों के कारण जिन्होंने करोड़ो का लोन तो लिया लेकिन समय पर चुकाया नहीं। बैंक ने उन लोगों को भरपूर पैसा दे डाला जो डूब रहे थे। कैफे कॉफी डे ग्रुप के मालिक ने कर्ज के कारण आत्महत्या कर ली जबकि जेट एयरवेज के मालिक नरेश मित्तल ने भी जेट को डूबो दिया।
वही बैंक के तीसरे बड़े लोन लेने वालों में अनिल अंबानी हैं, जिनकी कंपनी भी नष्ट होने के कगार पर है, इनके ऊपर ₹12800 crore बकाया है। यस बैंक का 10 बड़े कारोबारी समूहों से जुड़े लगभग 44 कंपनियों के पास कथित तौर पर 34,000 करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। अनिल अंबानी समूह की नौ कंपनियों ने 12,800 करोड़ रुपये तथा एस्सेल ग्रुप ने 8,400 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है।
अन्य कंपनियों में डीएचएफएल ग्रुप, दीवान हाउजिंग फाइनैंस कॉर्पोरेशन, जेट एयरवेज, कॉक्स ऐंड किंग्स तथा भारत इन्फ्रा ने भी यस बैंक से अच्छा-खासी रकम लोन ले रखी है।
ईडी की टीम राणा कपूर की पत्नी और तीनों बेटियों से भी पूछताछ कर रही है। राणा कपूर की पत्नी का नाम बिंदू कपूर और बेटियों के नाम राखी कपूर टंडन, रोशनी कपूर और राधा कपूर हैं। ईडी को शक है कि राणा कपूर को रिश्वत की राशि कई शेल कंपनियों के माध्यम से भेजी गईं और इनके नाम कई शेल कंपनियां हैं।
इधर राणा कपूर की दूसरी बेटी रोशनी कपूर को मुंबई एयरपोर्ट पर लंदन जाने से रोक दिया गया। वह ब्रिटिश एयरवेज से लंदन जाने की कोशिश कर रही थीं। वही ईडी ने हॉलिडे कोर्ट में अपने रिमांड ऐप्लिकेशन में मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी कहानी को बताया कि किस तरह राणा कपूर ने अपने परिवार के नियंत्रण वाली कंपनियों के जरिए 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रिश्वत ली।
इडी ने बताया है कि कैसे राणा की सेक्रेटरी लता दवे ने डीएचएफएल के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके 600 करोड़ रुपये का लोन लिया, जिसे रिश्वत माना जा रहा है। यह लोन DOIT अर्बन वेंचर्स नाम की फर्म के लिए लिया गया, जिसकी कर्ताधर्ता यस बैंक के फाउंडर की तीनों बेटियां हैं।
ईडी के मुताबिक, यह रिश्वत यस बैंक द्वारा डीएचएफल ग्रुप की कंपनियों के लिए मंजूर किए गए लोग और 4,450 करोड़ रुपये के डिबेंचर इन्वेस्टमेंट के बदले में चुकाई गई थी।