महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ समय से सब ठीक नहीं चल रहा है, शिव सेना और बीजेपी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा और बहुमत भी हासिल कर लिया लेकिन सरकार बना ली शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस ने, वही सरकार बनने के बाद एनपीआर पर खुलकर इन इन पार्टियों के मतभेद सामने आये।
एनपीआर पर उद्धव ठाकरे का कहना है की यह एक नियमित होने वाली पक्रिया है वही कांग्रेस और एनसीपी इसका विरोध कर रहे है। अब एक बार फिर राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है और अब मुद्दा बना है ” शिक्षा में मुस्लिमों को आरक्षण “, दरअसल अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक द्वारा विधान परिषद को यह सूचित किया गया है कि सरकार मुस्लिमों को शिक्षा में पांच प्रतिशत आरक्षण मुहैया कराएगी।
सिर्फ इतना ही नहीं नबाब मलिक ने जल्द ही इसके ऊपर विधेयक लाने की बात की है। लेकिन शिव सेना के अंदर अभी इस बात को लेकर सहमति नहीं बन पायी है, दरअसल माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे धर्म के आधार पर आरक्षण के पक्ष में नहीं है वही इसके ऊपर बीजेपी ने भी अपनी राय दी है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुगंतीवार कहा कि अगर धर्म के आधार पर आरक्षण देना है तो सिखों और ईसाइयों ने क्या गलती की है ? वही उन्होनें यह भी कहा है कि अगर कांग्रेस और एनसीपी शिव सेना को सरकार गिराने की धमकी देकर विधेयक पारित करवाने की कोशिश करते है तो वो शिव सेना का हाथ थामने से नहीं हिचकिचाएगी।
वैसे यह विधेयक पास होगा या नहीं ये अलग चर्चा है लेकिन इतना जरूर है की सरकार बनने के कुछ ही महीनों के भीतर तीनों सत्ताधारी पार्टियों के बीच खुलकर मतभेद सामने आना आम आदमी के हित में नहीं है।