निर्भया के दोषी विनय को उच्च स्तरीय चिकित्सा का मांग करने वाली याचिका को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने शनिवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसे दोषी जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई हो, उनका चिंतित और अवसाद में होना सामान्य है। इस मामले में जाहिर तौर पर दोषी को पर्याप्त चिकित्सा उपचार और मनोवैज्ञानिक सहायता दी गई है।
बताते चले कि, इस मामले में अब तक वतीसरी बार डेथ वॉरंट जारी किया जा चुका है और उसके मुताबिक तीनों को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी दी जानी है लेकिन दोषियों को बचाव के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है। कभी दोषी खुद को मानसिक रोगी बतात रहे हैं, तो कभी यह तर्क देते हैं कि वह घटना के वक्त नाबालिग थे।
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, फांसी से पहले दोषियों को घबराहट और अवसाद होना स्वाभाविक है। इस बात के सबूत मौजूद हैं कि इस केस में उपयुक्त मेडिकल ट्रीटमेंट और मनोवैज्ञानिक मदद दोषी को दिलाई गई है। वहीं, कोर्ट के फैसले के बाद निर्भया की मां आशादेवी ने कहा कि, यह फांसी को टालने का एक तरीका था। दोषी कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। उनके लगभग सभी कानून उपाय खत्म हो चुके हैं और मुझे उम्मीद है कि उन्हें 3 मार्च को फांसी हो जाएगी।
मामले में सुनवाई के दौरान तिहाड़ प्रशासन ने शनिवार को दलील दी कि विनय का दावा ‘तोड़े मरोडे गए तथ्यों का पुलिंदा’ है। जेल के अधिकारियों ने शनिवार को अडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा को बताया कि सीसीटीवी फुटेज से साबित हुआ है कि दोषी विनय कुमार शर्मा ने चेहरे को खुद ही जख्मी कर लिया और वह किसी मनौवैज्ञानिक विका से ग्रस्त नहीं है।