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नवेगांव उदासी टोला में 40 वर्षों से बुनियादी सुविधाओं का अभाव, ग्रामीण पेयजल और बिजली संकट से परेशान

सौसर/पांढुर्णा क्षेत्र के नवेगांव उदासी टोला में ग्रामीण पिछले करीब 40 वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव में पेयजल संकट गहराया हुआ है और लोगों को पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है। वहीं अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। प्रशासनिक जटिलताओं और परिसीमन की स्थिति के कारण विकास कार्य भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने स्थायी पेयजल व्यवस्था और नियमित बिजली आपूर्ति की मांग की है।

By: Nivedita 
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नवेगांव उदासी टोला में 40 वर्षों से बुनियादी सुविधाओं का अभाव, ग्रामीण पेयजल और बिजली संकट से परेशान

सौसर/पांढुर्णा क्षेत्र के ग्राम पंचायत सतनुर अंतर्गत नवेगांव उदासी टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले लगभग 40 वर्षों से गांव की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, जिसके कारण जीवन कठिन हो गया है।

अनियमित बिजली आपूर्ति से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार गांव में प्रतिदिन केवल 10 घंटे के आसपास ही बिजली आपूर्ति हो पाती है, वह भी अनियमित रूप से। बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई निश्चित समय नहीं है। लगातार बिजली कटौती से दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं गर्मी में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

पेयजल संकट ने बढ़ाई मुश्किलें

गांव में पेयजल की समस्या सबसे गंभीर बनी हुई है। भीषण गर्मी के कारण हैंडपंपों और जल स्रोतों का स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए दूर-दराज तक भटकना पड़ रहा है। कई परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।

प्रशासनिक जटिलताओं से प्रभावित विकास कार्य

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की प्रशासनिक स्थिति भी विकास कार्यों में बाधा बन रही है। पंचायत क्षेत्र पांढुर्णा विधानसभा में आता है, जबकि नवेगांव उदासी टोला सौसर विधानसभा क्षेत्र में शामिल है। परिसीमन के बाद से क्षेत्रीय समन्वय की कमी का खामियाजा यहां के दर्जनों परिवार भुगत रहे हैं।

ग्रामीणों ने की त्वरित समाधान की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गांव में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और स्थायी पेयजल व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान हो सके। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देते हैं।

 

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