एलआईसी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है. साथ ही यह देश की सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक है,इस दिग्गज बीमा कंपनी ने इस साल इक्विटी से कमाए गए मुनाफे के बड़े हिस्से को भुना लिया है. इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में एलआईसी को शेयरों में निवेश से इतना फायदा हुआ, जो बीते वित्त वर्ष के पूरे साल के बराबर था.
एलआईसी ने कई सेक्टर की कंपनियों में कॉन्ट्रा निवेश किया. इनमें ऑटो और बैंकिंग प्रमुख हैं. आंकड़े बताते हैं कि दूसरी तिमाही में एलआईसी ने ल्यूपिन, एल्केम लैब्स और फाइजर जैसे शेयरों में हिस्सेदारी बढ़ाई. इन शेयरों ने सितंबर तिमाही के दौरान 24 फीसदी तक की छलांग लगाई.
इस बीमा कंपनी ने आईटी कंपनी एम्फैसिस में अपनी हिस्सेदारी 1.96 फीसदी से बढ़ाकर 2.11 फीसदी कर दी. सितंबर तिमाही के दौरान इस शेयर ने 56 फीसदी की तेजी दिखाई.
ऑटो और ऑटो पार्ट्स सेक्टर से एलआईसी ने त्योहारी सीजन से पहले अमारा राजा बैट्रीज, अशोक लेलैंड, बॉश, एक्साइड इंडस्ट्रीज, हीरो मोटो कॉर्प और टीवीएस मोटर्स में हिस्सेदारी बढ़ाई. 16 अक्टूबर को केयर रेटिंग्स ने कहा था कि त्योहारी सीजन के दौरान ऑटो सेक्टर के तमाम सेगमेंट की बिक्री बढ़ सकती है.
अल्फाएक्यूरेट एडवाइजर्स के संस्थापक और एमडी राजेश कोठारी ने कहा, “आने वाले ढाई से चार साल के दौरान ऑटो सेक्टर को काफी फायदा हो सकता है. इस दौरान इस सेक्टर में काफी अच्छी रिकवरी देखने को मिल सकती है.” कोठारी ने कहा कि अर्थव्यवस्था के साथ-साथ टॉप तीन बैंक अच्छी ग्रोथ हासिल करते रहने वाले हैं.
एलआईसी को भी इसका फायदा मिल सकता है क्योंकि इसने कई बैंकिंग शेयरों में निवेश किया. एलआईसी ने फाइनेंस सेक्टर से भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, एचडीएफसी, कोटक महिंद्रा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडसइंड बैंक, यस बैंक और बंधन बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाई. अगस्त में एलआईसी ने खुले बाजार से यस बैंक के शेयर खरीदकर इसमें अपनी हिस्सेदारी 1.64 फीसदी से 4.99 फीसदी तक पहुंचा दी.

आदित्य बिड़ला सनलाइफ एएमसी के सीआईओ इक्विटी महेश पाटिल ने कहा कि बैंकिंग, वित्तीय और पीएसयू कंपनियों में कॉन्ट्रा निवेश के मौके आते हैं. उन्होंने कहा, “मार्चे के निचले स्तरों से 55 फीसदी की छलांग के बावजूद बाजार में कॉन्ट्रा निवेश के कई मौके हैं.
उन्होंने कहा, “बैंकों और एनबीएफसी की वैल्यूएशन काफी आकर्षक नजर आ रही है. यहां से एसेट क्वालिटी में बड़ी गिरावट के आसार कम ही है. बाजार से अच्छी वापसी की उम्मीद है.
उन्होंने बताया कि युटिलिटी और तेल व गैस सेगमेंट की सरकारी कंपनियों में काफी अवसर नजर आ रहे हैं. ये कंपनियां अभी दशक के निचले स्तरों पर मिल रही हैं. इन कंपनियों का डिविडेंड यील्ड भी काफी अच्छी है, जबकि नकद प्रवाह बेहतरीन है.
ऐसा लगता है कि एलआईसी को यह थीम रास आई है. सितंबर तिमाही के दौरान एलआईसी ने इंडियन ऑयल, पावर ग्रिड, ऑयल इंडिया, ओएनजीसी, मोइल, महानगर गैस और आईजीएल जैसे शेयरों में निवेश किया. बीते तीने महीनों में इन शेयरों ने 21 फीसदी तक की छलांग लगाई.
मेटल सेक्टर से एलआईसी ने जेएसडब्ल्यू स्टील और भारतीय स्टील प्राधिकरण (सेल) के शेयर खरीदे, जो सितंबर तिमाही के दौरान क्रमश: 6 फीसदी टूटे और 11 फीसदी चढ़े. एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने जेएसडब्ल्यू स्टील पर भरोसा जताते हुए उसे 372 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है.
सितंबर तिमाही के दौरान एलआईसी द्वारा कुछ बड़ी खरीदारी में फुटवीयर कंपनी बाटा इंडिया, पेंट दिग्गज बर्जर पेंट्स, जूलरी कंपनी टाइटन और सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक और एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर का नाम आता है.