Trump Tariff : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, जिसके साथ भारत पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया है। यह शुल्क अगस्त माह के अंत तक लागू होगा। भारत सरकार इस पर काबू पाने के लिए कई मोर्चों पर सक्रिय है। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल के अनुसार, सरकार अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रही है और साथ ही विश्व के अन्य बाजारों में भी अवसर तलाश रही है। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर पांच दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। 25 अगस्त से इस वार्ता का अगला दौर होने की संभावना है, जिसमें अमेरिकी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भाग ले सकता है।
वाणिज्य सचिव ने बताया कि अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ केवल भू-राजनीतिक कारणों से जुड़ा है, न कि व्यापारिक मुद्दे से। इसके बावजूद भारत ने अपनी निर्यात प्रतिस्पर्धा, एक्सपोर्ट प्रमोशन और आयात-निर्यात विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत और अमेरिका का लक्ष्य दोनों देशों के व्यापार को दोगुना करना है, और इस दिशा में संयुक्त बयान भी जारी किया गया है।
भारत का फोकस केवल अमेरिका पर नहीं है। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ भारत का FTA 1 अक्टूबर से लागू होगा, जिसमें स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। ब्रिटेन के साथ भी भारत ने समझौता शीघ्र लागू करने का आग्रह किया है। ऑस्ट्रेलिया के साथ ECTA समझौते में निर्यात 84% और आयात 86% तक पहुंच चुका है। भारत ने अपनी प्राथमिकता सूची को 20 देशों से बढ़ाकर 50 देशों तक किया है, जो कुल एक्सपोर्ट बास्केट का 90% हिस्सा हैं। एपीडा ने अप्रैल-जुलाई 2025 में 15 नए खाद्य उत्पादों को 28 नए बाजारों में निर्यात किया है।
इस रणनीति से भारत न केवल अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने की दिशा में काम कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।