भोपाल से सामने आए एक राजनीतिक घटनाक्रम में मध्य प्रदेश सरकार की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र को राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति द्वारा वैध घोषित किए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने समिति के निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष एवं मामले के शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की अनदेखी की गई। उनका दावा है कि सरकार के दबाव में मंत्री प्रतिमा बागरी को क्लीन चिट दी गई, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
प्रदीप अहिरवार का कहना है कि जांच के दौरान 1950 के अनुसूचित जाति आदेश, 1961 और 1971 की जनगणना के रिकॉर्ड, ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट और 2007 के राजपत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। उनके अनुसार, इन अभिलेखों के आधार पर मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए थी।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान मंत्री प्रतिमा बागरी की मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद जांच प्रभावित हुई। हालांकि, इस आरोप पर मंत्री प्रतिमा बागरी या राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। समिति पहले ही प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को वैध घोषित कर चुकी है।
प्रदीप अहिरवार ने कहा है कि राज्य स्तरीय समिति के फैसले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक हुआ तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी ले जाया जाएगा। अब इस प्रकरण में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।