शिवपुरी जिले के नरवर किले से ऐतिहासिक धरोहर की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बदमाश किले की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए करीब 400 साल पुरानी एक तोप को लोडिंग वाहन में भरकर ले गए। घटना के बाद पुलिस और पुरातत्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि वारदात किसी सामान्य चोरी की तरह नहीं थी, बल्कि बदमाश पूरी योजना बनाकर किले में पहुंचे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब 30 हथियारबंद लोग वाहनों के साथ मौके पर आए और भारी-भरकम तोप को उठाकर फरार हो गए। घटना से यह आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे किसी संगठित एंटीक तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, 5 जुलाई को भी अज्ञात लोगों ने नरवर किले की ओपन कचहरी में रखी इस तोप को उसके स्थान से गिरा दिया था। उस समय वजन अधिक होने के कारण बदमाश इसे ले जाने में सफल नहीं हो सके थे। इस घटना के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था में प्रभावी बदलाव नहीं किए गए और करीब 12 दिन बाद बदमाश दोबारा लौटे। इस बार वे वाहन लेकर पहुंचे और तोप को लेकर फरार हो गए।
घटना के समय तैनात सुरक्षा गार्ड बालकिशन के अनुसार, अचानक बड़ी संख्या में हथियारबंद लोग किले में पहुंचे। बदमाशों ने उन्हें धमकाया और उनके पास मौजूद सीमित संसाधनों के कारण वे विरोध नहीं कर सके। गार्ड ने बताया कि बदमाशों के पास हथियार थे, जबकि सुरक्षा के लिए उनके पास केवल डंडे थे।
पुलिस जांच में किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर वाहनों के टायरों के निशान मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि बदमाशों ने पहले से रास्ते और पूरी वारदात की योजना तैयार कर रखी थी। पुलिस मामले को सामान्य चोरी नहीं मान रही है और कई पहलुओं से जांच कर रही है।

नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया शासनकाल की कुल 14 ऐतिहासिक तोपें रखी गई थीं, जिनमें से अब एक गायब हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार ये तोपें पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी दुर्लभ धातुओं से निर्मित थीं। इन पर तत्कालीन राजचिह्न के साथ फारसी और देवनागरी भाषा में अभिलेख भी अंकित हैं, जिससे इनका पुरातात्विक महत्व और बढ़ जाता है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया और शिवपुरी पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने नरवर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया।अब पुलिस सीसीटीवी, स्थानीय जानकारी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर बदमाशों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
नरवर किले से इतनी भारी और प्राचीन तोप का चोरी होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 12 दिन पहले संकेत मिलने के बावजूद सुरक्षा मजबूत नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और सभी की नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हुई है।