कैमूर जिले में जिला परिषद अध्यक्ष रिंकी सिंह के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को जिला प्रशासन ने खारिज कर दिया है। जिला परिषद सदस्यों द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर जांच के बाद जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह ने इसे स्वीकार नहीं किया। फैसले के बाद जिला परिषद अध्यक्ष ने इसे खुद को परेशान करने की साजिश बताया।
जानकारी के अनुसार, जिला परिषद सदस्य विकास सिंह समेत कुछ अन्य सदस्यों ने अध्यक्ष रिंकी सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन जिलाधिकारी को सौंपा था। इसके बाद मामले की जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच प्रक्रिया के बाद बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 के प्रावधानों के आधार पर प्रस्ताव को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया।
फैसले के बाद जिला परिषद कार्यालय में प्रेसवार्ता करते हुए रिंकी सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद के कारण जिला परिषद की कई विकास योजनाओं का काम प्रभावित हुआ। उन्होंने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था।

रिंकी सिंह ने बताया कि बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 की धारा 70 के तहत जिला परिषद के कार्यकाल की समाप्ति से छह महीने पहले अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। उन्होंने कहा कि इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर प्रस्ताव को खारिज किया गया है।
जिला परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जिला परिषद के सभी सदस्य एक परिवार की तरह हैं और परिवार में छोटे-मोटे मतभेद होना सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि अब सभी मिलकर जिले के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि योजनाओं के तहत लंबित कार्यों को जल्द पूरा कराया जाएगा और जनता से जुड़े विकास कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।