देश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और जनसुरक्षा की चिंताओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों, राजमार्गों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे स्थलों पर मवेशियों और कुत्तों की मौजूदगी लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी राज्य सरकारें और नगर निकाय अपने-अपने क्षेत्रों में आवारा मवेशियों और कुत्तों को तुरंत सड़कों से हटाएं और उन्हें निर्धारित पशु आश्रय गृहों (shelter homes) में भेजें। अदालत ने कहा कि यह कदम सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और हादसों को रोकने के लिए जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे आठ हफ्तों के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करें और बताएं कि इस आदेश के अनुपालन में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख करना होगा कि कितने पशु सड़कों से हटाए गए, उन्हें किन आश्रय गृहों में रखा गया, और भविष्य में इस समस्या को रोकने के लिए क्या स्थायी कदम उठाए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर में आवारा मवेशियों के कारण हो रहे सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई बार हाईवे और सिटी रोड्स पर अचानक पशुओं के आने से गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान होता है। अदालत ने इसे “गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा का मामला” बताते हुए कहा कि राज्यों को इस पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
राज्यों और नगर निकायों की जिम्मेदारी तय
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़कों से पशुओं को हटाना केवल पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्थानीय निकायों, नगर निगमों और जिला प्रशासन की भी जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि भविष्य में लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी जवाबदेह होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में कहा — “राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों से आवारा पशुओं को तुरंत हटाया जाए। इन पशुओं को सुरक्षित आश्रय गृहों में रखा जाए ताकि नागरिकों की जान की रक्षा हो सके।”
प्रमुख बिंदु