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जीतू पटवारी का बड़ा बयान: “घृणा से घृणा का जवाब देना कांग्रेस की विचारधारा नहीं”

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस की राजनीति घृणा का जवाब घृणा से देने में विश्वास नहीं रखती, बल्कि प्रेम और जोड़ने की विचारधारा पर आधारित है। उन्होंने राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और ‘मोहब्बत की दुकान’ का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की मूल सोच को स्पष्ट किया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव का सम्मान करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। अपने बयान में उन्होंने राजनीतिक संवाद को मर्यादित और सकारात्मक बनाए रखने पर जोर दिया।

By: Nivedita 
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जीतू पटवारी का बड़ा बयान: “घृणा से घृणा का जवाब देना कांग्रेस की विचारधारा नहीं”

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की मूल विचारधारा और राजनीतिक मर्यादा को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही है। जीतू पटवारी ने साफ शब्दों में कहा कि राजनीति में घृणा का जवाब घृणा से देना कभी भी कांग्रेस का विचार नहीं रहा है। उनके अनुसार, कांग्रेस की पहचान हमेशा से जोड़ने और प्रेम बांटने की रही है।

राहुल गांधी की ‘मोहब्बत की दुकान’ का दिया हवाला

जीतू पटवारी ने कांग्रेस के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने देश में 4,000 किलोमीटर की पैदल यात्रा सिर्फ इसलिए तय की ताकि वे देशवासियों के बीच ‘मोहब्बत की दुकान’ खोल सकें। पटवारी ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की विचारधारा सिर्फ और सिर्फ प्रेम, प्यार और मोहब्बत पर आधारित है, न कि किसी प्रकार की नफरत पर।

“मुख्यमंत्री पद की गरिमा रखना मेरा भी दायित्व” — जीतू पटवारी

विपक्ष के नेता के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के पद का पूरा सम्मान किया। उन्होंने कहा कि मोहन यादव जी हमारे पूरे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री के पद की गरिमा को बनाए रखना देश के हर नागरिक का कर्तव्य है, और विपक्ष का मुख्य चेहरा होने के नाते यह मेरा भी उतना ही बड़ा दायित्व है।

अखाड़े के पहलवान और मुख्यमंत्री के धैर्य पर उठाए सवाल

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि वे बचपन में अखाड़े जाते थे और कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी रहे हैं। उन्होंने एक सुंदर तर्क देते हुए कहा: “जो व्यक्ति अखाड़े में जाता है, वह पहलवान दृढ़ता, सब्र और धैर्य का प्रतीक होता है। उसके अंदर बहुत पेशेंस (सहनशीलता) होती है। अखाड़ा सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि दिमाग को भी ताकतवर बनाता है।”

जीतू पटवारी ने आगे कहा कि जब अखाड़े से निकला हुआ ऐसा पहलवान (मुख्यमंत्री) अपना धैर्य खोने लगे और ऐसी बातें बोले जो लोगों को बुरी लगें, तो फिर उनके प्रति एक सहानुभूति (सिम्पैथी) की भावना पैदा होती है।

प्रेम और गरिमा से संवाद की अपील

अपने बयान के अंत में जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी को हमेशा उसी खिलाड़ी भावना और प्रेम के साथ बात करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष में रहते हुए भी वे हमेशा मर्यादित और सकारात्मक संवाद की उम्मीद रखते हैं और उन्होंने खुद भी हमेशा इसी गरिमा का पालन किया है।

 

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