आज भी याद है वह क्षण जब प्रधानमंत्री ने अपनी एक सरल, मानवीय प्रतिक्रिया से मुझे नेतृत्व का असली अर्थ समझाया था। आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदर्शिता और विचारों ने मेरी जनसेवा की इस पूरी यात्रा को निरंतर प्रेरणा और दिशा दी है। “मेरी कलम से”, मेरी यात्रा की वही प्रेरक कहानी पढ़िए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुझे आज भी वह क्षण याद है जब प्रधानमंत्री ने अपनी एक सरल, मानवीय प्रतिक्रिया से मुझे नेतृत्व का असली अर्थ समझाया था। शपथ लेने के ठीक अगले दिन मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक थी और उसी दिन मेरी बेटी का विवाह भी। पहली ही बैठक में अवकाश मांगने में संकोच था, लेकिन हिम्मत करके मैंने अपनी स्थिति उन्हें बताई।
उन्होंने मुस्कुराकर कहा “कोई बात नहीं, मत आइए। यह सुनते ही मेरे मन का बोझ हल्का हो गया। चाय के समय उनका दूसरा वाक्य मेरे दिल को छू गया आपने बेटी की शादी में बुलाया भी नहीं।” उनकी यह सहजता, यह अपनापन यहीं समझ आया कि मोदी सिर्फ एक प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि अपने साथ काम करने वालों के जीवन से दिल से जुड़े हुए एक मार्गदर्शक हैं। यही वह प्रेरणा है जिसने मेरे जनसेवा के मार्ग को मजबूत आधार दिया। प्रधानमंत्री आपके नेतृत्व ने मेरे सार्वजनिक जीवन की दिशा बदलते हुए जनसेवा के प्रति मेरे भीतर एक नई ऊर्जा और दृढ़ संकल्प जगाया है।
आपके “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र ने मुझे महराजगंज की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को और गहराई से समझने की शक्ति दी है। जनता दर्शन से लेकर हर समस्या की ज़मीन पर जाकर सुनवाई तक, हमारे हर प्रयास में आपकी सीख और आपके मार्गदर्शन की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।
मै स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे आपके मार्गदर्शन में कार्य करने का अवसर मिला है। वित्त राज्य मंत्री के रूप में मेरी हर जिम्मेदारी, हर निर्णय और हर पहल के पीछे आपकी सीख, आपका स्नेह और आपका नेतृत्व मेरी ताकत वनकर खड़ा है। प्रधानमंत्री, आपका आशीर्वाद और मार्गदर्शन मेरे लिए जनसेवा के इस पवित्र मार्ग पर आगे चढ़ने की सबसे वड़ी शक्ति है।