इंदौर। मध्यप्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के तहत लागू किया गया ‘जीतू फॉर्मूला’ इंदौर में पूरी तरह जमीन पर उतर चुका है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस फॉर्मूले को सबसे पहले अपने गृह जिले इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू कराया था, जो अब संगठनात्मक दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े के अनुसार, प्रदेश में सबसे पहले इंदौर जिले में सभी ग्राम पंचायत समितियों और वार्ड पंचायत समितियों का गठन पूर्ण कर लिया गया है। जिले की 335 ग्राम पंचायतों और 128 वार्डों में अध्यक्षों के साथ-साथ 25-25 सदस्यों की कार्यकारिणी गठित की जा चुकी है।
25 सदस्यीय कार्यकारिणी में युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस, एससी/एसटी प्रकोष्ठ सहित कांग्रेस के सभी अनुषंगी संगठनों से एक-एक प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि इन नियुक्तियों में क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा गया। वानखेड़े ने बताया कि यह पूरा संगठनात्मक गठन ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय नेताओं के साथ बैठकों और आपसी समन्वय के बाद किया गया। इस प्रक्रिया में जिलेभर के लगभग 50 हजार कार्यकर्ताओं से चर्चा कर उनकी राय और सहभागिता सुनिश्चित की गई।
इस अभियान के तहत इंदौर जिले में 10 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में जमीनी स्तर पर संगठन तैयार होना पार्टी के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।

कांग्रेस में यह फॉर्मूला पहली बार इंदौर में लागू हुआ है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह संगठनात्मक प्रयोग 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
इंदौर में सबसे पहले संगठन गठन का कार्य पूरा होना प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि कांग्रेस अब केवल चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि जमीनी संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर गंभीरता से काम कर रही है।