सीहोर जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां मरीजों की जान बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली 108 आपातकालीन एंबुलेंस खुद ही खराब हालत में नजर आ रही है। कई बार ऐसी स्थिति देखी गई है कि एंबुलेंस को राहगीरों के सहारे धक्का देकर चालू करना पड़ता है।
जिला अस्पताल परिसर और राष्ट्रीय राजमार्ग पर एंबुलेंस के बंद होने के बाद उसे धक्का लगाकर चलाने की घटनाएं सामने आई हैं। इस स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी गंभीर मरीज को समय पर उपचार नहीं मिल पाता, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
इसी बीच जिला अस्पताल से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला डॉक्टर द्वारा अस्पताल परिसर के बाहर दलालों की मौजूदगी को लेकर टिप्पणी की जाती है। वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि संबंधित डॉक्टर द्वारा निजी क्लीनिक और अन्य अस्पतालों में भी उपचार किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
इन घटनाओं के सामने आने के बाद अब सभी की नजरें स्वास्थ्य विभाग पर हैं कि वह इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।