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समस्त सृष्टि के स्वामी भगवान विष्णु की व्यवस्था कैसे चलती है ? जानिये

By: RNI Hindi Desk 
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समस्त सृष्टि के स्वामी भगवान विष्णु की व्यवस्था कैसे चलती है ? जानिये

{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }

वेद वेदान्तों के अनुसार भगवान विष्णु को ही इस ब्रह्माण्ड का स्वामी माना गया है। शास्त्रों में वर्णन आता है कि योगमाया से ही उनके स्वरूपों का विस्तार हुआ और हमारे सन्मुख वो प्रकट हुए इसलिए ही हम भगवान विष्णु को त्रिलोकी का नाथ कहते है। हम उन्हें एक दैवीय शक्ति मानकर उनकी पूजा और साधना भी करते है और बेहद ही श्रृद्धा भाव से उनकी पूजा करते आ रहे है।

भगवान विष्णु सनातन धर्म की अमिट धुरी के रूप में कार्य कर रहे है और इसमें कोई शक नहीं है और न ही किसी को कभी होगा। भगवान समय समय पर हर युग में अपने भक्तों का उद्धार करने के लिए अपने स्वरुप का विस्तार करते हुए मनुष्य रूप में अवतार लेते है और दुष्टों का संहार करते है और भक्तों को सुखी करते है।

भगवान विष्णु जो जिन्हे हम आदिकाल से भगवान नारायण कहते है, उन्होनें संसार की व्यवस्था बनाये रखने के लिए ब्रह्मा को सृष्टिकर्ता बनाया, शिव को संहारक बनाया। इस प्रकार उन्होनें अपना दायित्व पूरा किया और खुद सृष्टि के सृजनकर्ता बने जो की अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। इस कार्य को सुचारु रूप से बनाये रखने के लिए तथा सृष्टि का सही संचालन करने के लिए भगवान विष्णु ने विभिन्न प्राणियों का निर्माण किया। पशु पक्षी कीड़े मकोड़े आदि की उन सबके कर्मों के अनुसार उम्र निर्धारित की है।

श्री अचल सागर जी महाराज का लोग स्वागत करते हुए

वही इसके अलावा हानि, लाभ, जीवन मरण यश अपयश आदि सब उसने अपने हाथ में रखे ताकि सृष्टि का सञ्चालन निर्बाध रूप से हो सके। उसी नारायण ने मानव और दानव भी पैदा किये ताकि संतुलन बना रहे वही अच्छे कर्म करने के लिए मनुष्य को विवेक भी प्रदान किया है। आकाश मंडल में घूमने वाले 9 ग्रह अपने अपने स्वाभाव के अनुसार मनुष्य को सुख दुःख, संतान और समृद्धि प्रदान करते है। इसी को हम उस परम ईश्वर की व्यवस्था कहते है।

लेकिन कई बार जब आसुरी लोग इस धरती पर बढ़ जाते है तो स्वयं भगवान् विष्णु अवतार लेकर पाप का खात्मा करते है। वही कई बार वो खुद अवतार नहीं लेकर मनुष्य की आत्मा को ही देव तुल्य बना देते है और मनुष्य रूप में वो मानव जाति के कल्याण के रूप में काम करते है।

जैसे महावीर स्वामी, गौतम बुद्ध, विवेकानंद। ये सब भले ही भगवान नहीं थे लेकिन इनकी आत्मा पवित्र थी और उन्होंने मानव जाति के लिए अनेक अच्छे कार्य किये। इसलिए सिर्फ यह सोचना की वो ही अवतार लेते है यह गलत है। वो तो हर मनुष्य की आत्मा में विराजमान है। जिस दिन आप अपने आप को पहचान जायेगे उसी दिन आपका साक्षात्कार उससे हो जाएगा।

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