आखिरकार 19 सालों के लम्बे इंतज़ार के बाद अमेरिका और तालिबान में शांति समझौता हो ही गया और ISIS के खात्मे के बाद इसे डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी कामयाबी की तौर पर देखा जा रहा है। आज अमेरिका ने तालिबान के साथ शनिवार को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए और 14 माह के भीतर अपने सारे सैनिकों को वापस बुलाने की बात भी की है।
तालिबान के वार्ताकार मुल्ला बिरादर ने समझौते पर हस्ताक्षर किए वहीं दूसरी ओर से अमेरिका के वार्ताकार ज़लमय खलीलजाद ने हस्ताक्षर किए. इस पुरे प्रकरण में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यदि तालिबान समझौते का पालन करता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश अफगानिस्तान से 14 माह के भीतर अपने बलों को वापस बुला लेंगे. नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टनबर्ग ने समझौते को ‘स्थाई शांति की दिशा में पहला कदम’ करार दिया.
आपको बता दे कि अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर पर जब हमला हुआ था तो अमेरिका ने तालिबान से कहा था की वो उसे ओसामा की सौंप दे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और साल 2001 में अमरीका ने अफगानिस्तान में अपनी सीमा भेज दी थी जो आज भी मौजूद है।