वैसे तो एंकर के बारे में कहा जाता है कि उसे इमोशंस में नहीं आना चाहिए लेकिन एंकर भी आखिर एक मनुष्य ही होता है। और उसमे भी भावना होना स्वाभाविक है। इसी पर अपने विचार खुलकर रखे जी बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने।
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अनिल सिंघवी ने कहा कि मेरे ख्याल से हम एकमात्र ऐसे चैनल होंगे, जो कोई पॉलिटिकल डिबेट नहीं करते हैं। इसलिए इस तरह की स्थिति या कहें कि समस्या हमारे सामने नहीं आती है। लेकिन पॉइंट यही है कि यदि आपने अपने एडिटोरियल कंटेंट में कोई एक लाइन पकड़ी हुई है और आप उस लाइन पर चलते हैं तो दर्शकों को वो साफ नजर आती है।
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अब यदि दर्शक उसे पसंद करेंगे तो कहेंगे कि यह चैनल सबसे बढ़िया है। जो उसे पसंद नहीं करेंगे, वे कहेंगे कि चैनल तो अपना प्रोपेगेंडा चला रहा है। इमोशन पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि हर वक्त इमोशन आना चाहिए, लेकिन इमोशन का आना और इमोशन को लाना, इसमें काफी फर्क है। उनका कहना था कि बतौर न्यूज एंकर किसी भी चीज से इमोशन आना अच्छी बात है, लेकिन जब इसी इमोशन को लाने की कोशिश की जाती है, तो समस्या शुरू हो जाती है, क्योंकि वहां पर आप (न्यूज एंकर) एक्टिंग कर रहे होते हैं।
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उनका कहना था कि बतौर न्यूज एंकर किसी भी चीज से इमोशन आना अच्छी बात है, लेकिन जब इसी इमोशन को लाने की कोशिश की जाती है, तो समस्या शुरू हो जाती है, क्योंकि वहां पर आप (न्यूज एंकर) एक्टिंग कर रहे होते हैं।