उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भड़के दंगों में 34 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और अब केंद्र सरकार ने दिल्ली की सुरक्षा देश के NSA अजित डोभाल को सौंप दी है। इन दंगो में आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई, उनका शव चॉंदबाग के नाले से बरामद किया गया था।
जब कल दिल्ली विधानसभा में अरविन्द केजरीवाल बोलने खड़े हुए तो लगा की वो दंगो की ज़िम्मेदारी लेकर कोई ठोस कदम उठाने को कहेंगे लेकिन उन्होनें तो यह कहकर पल्ला झाड़ लिया की दंगाई दूसरे राज्यों से आये थे लेकिन अब उन्ही के दावों में वो घिरने लगे है और उसका सबसे बड़ा कारण है अंकित शर्मा की हत्या में उठ रहे कुछ नाम।
दरअसल आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका इन दंगों में संदिग्ध मानी जा रही है, कुछ वीडियो सामने आया है जिनमे यह साफ़ देखा जा सकता है कि उसके घर से लगातार गोलीबारी हो रही है। पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं। उसके छत पर जमा लोग पत्थरबाजी कर रहे हैं और वो खुद रॉड लेकर हाथ में खड़े है।
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चश्मदीदों के हवाले से अंकित शर्मा के भाई का बयान है कि उनके भाई के आलावा दो और लोगों को दंगाई खींचकर उनके घर के अंदर लेकर गए थे। ये बहुत बड़ा आरोप है क्योंकि अंकित शर्मा की हत्या को ख़ुद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने बहुत ही दुखद क्षति बताया है। केजरीवाल ने कहा है कि दोषियों को किसी भी हाल में नहीं बख्शा जाना चाहिए।
लेकिन अब आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन को लेकर सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं, ताहिर हुसैन की छत पर से पेट्रोल बम का जखीरा, कट्टों और ट्रे में बड़े-बड़े पत्थर, गुलेल आदि बरामद किए गए है। खुद देश के बड़े चैनल्स के पत्रकारों ने इसकी पुष्टि की है।
दरअसल जब मीडियाकर्मी छत पर पहुंचे तो वहां भयानक मंजर देखने को मिला, कोल्ड ड्रिंक की बोतलों में पेट्रोल भरा था। कई कट्टे, बोरियॉं मिलीं जिनमें से कुछ में पत्थर भी थे, अंकित के भाई के अनुसार उनके भाई ड्यूटी से लौट रहे थे जब दंगाई गली के बाहर से उन्हें खींचकर ले गए। भीड़ चार लोगों को खींचकर ताहिर हुसैन के मकान में लेकर गई और उन्हें मारकर नाले में फेंक दिया।
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लेकिन अब यहां सोचने वाली बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हिंसा क्या अचानक हो सकती है ? जिस तरह से अचानक 1 दिन के अंदर अंदर इतनी भीड़ को इकठ्ठा कर दिया गया क्या ये अचानक हुआ होगा ? इतने व्यापक पैमाने पर हिंसा सुनियोजित ही होती है।
एक तरफ अरविन्द केजरीवाल राजघाट जाकर दिल्ली की शांति की प्रार्थना करते है वही दूसरी और उनकी ही पार्टी के पार्षद दँगाईयों की भीड़ का नेतृत्व कर रहे है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि केजरीवाल आज उसी रास्ते पर चल रहे है जिस रास्ते पर उत्तरप्रदेश में सपा चली थी। आज देश की राजधानी दिल्ली में गुंडों को आश्रय आखिरकार दे कौन रहा है ?
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एक तरफ अरविन्द केजरीवाल यह कहकर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते है की उन्होंने केंद्र से सेना का अनुरोध कर दिया है वही उन्ही की नाक के नीचे उन्ही के लोग और विधायक उकसाई हुई भीड़ का नेतृत्व करते है तो ऐसे में कहीं अगर अंकित की ह्त्या के छींटे अगर आम आदमी पार्टी के दामन पर पड़ते है तो इससे बड़ी शर्मनाक बात केजरीवाल के लिये क्या होगी !