पन्ना। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल पन्ना जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पाने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि अस्पताल में लगी सोनोग्राफी मशीन लंबे समय से उपयोग में नहीं आ रही है, क्योंकि इसे संचालित करने के लिए आवश्यक डॉक्टर या प्रशिक्षित ऑपरेटर की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ रहा है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए निजी सोनोग्राफी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निजी केंद्रों पर सोनोग्राफी के नाम पर मरीजों से अलग-अलग राशि वसूली जा रही है। कुछ मामलों में यह शुल्क 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर ग्लोबल सोनोग्राफी, दिल्ली सोनोग्राफी, डीटी सोनोग्राफी और परमार सोनोग्राफी जैसे निजी केंद्रों का संचालन बताया गया है। मरीजों और स्थानीय लोगों की ओर से कुछ केंद्रों पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित निजी केंद्रों का पक्ष सामने आना बाकी है।
मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा शुरू नहीं होने के कारण मरीजों को निजी केंद्रों पर भेजे जाने की स्थिति बन रही है। वहीं, निजी सोनोग्राफी संचालकों को सरकारी अस्पताल की ओर से भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध है, तो उसका नियमित संचालन क्यों नहीं किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लोगों की मांग है कि जिला अस्पताल में जल्द से जल्द योग्य डॉक्टर या अधिकृत तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति की जाए और सोनोग्राफी मशीन का नियमित संचालन शुरू कराया जाए।
गरीब मरीजों को निजी केंद्रों पर आर्थिक बोझ से राहत दिलाने के लिए प्रशासन को शुल्क व्यवस्था और सरकारी भुगतान की भी जांच करनी चाहिए। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
पन्ना से राजेश रावत की रिपोर्ट।