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गोरखपुर एम्स का बड़ा शोध: अब दो घंटे में पता चलेगा टीबी दवा-प्रतिरोधी है या नहीं

गोरखपुर एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शोध में एक्सपर्ट MTB/XDR तकनीक की उपयोगिता सामने आई है। अध्ययन के मुताबिक इससे टीबी में दवा-प्रतिरोध की पहचान करीब दो घंटे में करने में मदद मिल सकती है, जिससे मरीजों का उपयुक्त इलाज जल्द शुरू किया जा सकेगा।

By: Nivedita 
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गोरखपुर एम्स का बड़ा शोध: अब दो घंटे में पता चलेगा टीबी दवा-प्रतिरोधी है या नहीं

गोरखपुर। टीबी की जांच और उपचार के क्षेत्र में गोरखपुर एम्स से अहम खबर सामने आई है। एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एक रिसर्च में ऐसी जांच तकनीक की उपयोगिता सामने आई है, जिसके जरिए टीबी के मरीज में दवा के प्रति प्रतिरोध का पता करीब दो घंटे में लगाया जा सकता है। इस शोध के परिणाम National Medical Journal of India में प्रकाशित हुए हैं।

दवा-प्रतिरोधी टीबी की पहचान में आएगी तेजी

माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरूप मोहंती के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया। रिसर्च में एक्सपर्ट MTB/XDR जांच तकनीक की उपयोगिता का मूल्यांकन किया गया।

इस तकनीक की मदद से मरीज के नमूने में मौजूद टीबी के जीवाणु में दवाओं के प्रति प्रतिरोध की सीधे पहचान की जा सकती है। इससे चिकित्सकों को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि मरीज के लिए सामान्य उपचार पर्याप्त है या दवाओं में बदलाव की जरूरत है।

कई महत्वपूर्ण दवाओं के प्रतिरोध की जांच

अध्ययन के अनुसार, तकनीक के जरिए रिफैम्पिसिन और आइसोनियाजिड के अलावा फ्लोरोक्विनोलोन, एथियोनामाइड तथा कुछ अन्य एंटी-टीबी दवाओं के प्रति संभावित प्रतिरोध की जानकारी हासिल की जा सकती है। दवा-प्रतिरोध की शुरुआती जानकारी मिलने से मरीज के लिए उपयुक्त उपचार जल्द शुरू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

100 नमूनों पर किया गया अध्ययन

शोध के दौरान टीबी से संक्रमित 100 नमूनों को अध्ययन में शामिल किया गया। इनमें से 89 नमूने नई जांच तकनीक से भी पॉजिटिव पाए गए। जांच में कुछ मरीजों में अलग-अलग एंटी-टीबी दवाओं के प्रति प्रतिरोध के संकेत मिले। इससे यह सामने आया कि ऐसे मरीजों में सामान्य उपचार के बजाय उनकी स्थिति के अनुसार अलग उपचार रणनीति की आवश्यकता हो सकती है।

समय पर जांच से बेहतर इलाज की उम्मीद

गोरखपुर एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के मुताबिक, दवा-प्रतिरोधी टीबी की जल्द पहचान मरीज के प्रभावी उपचार के लिए महत्वपूर्ण है। तेज जांच से उपचार की दिशा जल्दी तय करने में मदद मिल सकती है और इससे टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय प्रयासों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

चिकित्सकों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, लगातार बुखार, वजन कम होना, भूख में कमी, सीने में दर्द, बलगम में खून या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण हैं, तो उसे टीबी की जांच करानी चाहिए।सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत टीबी की जांच और उपचार की सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

टीबी के इलाज में अहम साबित हो सकती है तकनीक

गोरखपुर एम्स के इस अध्ययन से दवा-प्रतिरोधी टीबी की पहचान में लगने वाले समय को कम करने की संभावनाएं सामने आई हैं। यदि ऐसी तकनीक का व्यापक स्तर पर प्रभावी इस्तेमाल होता है, तो मरीजों में सही उपचार शुरू करने और दवा-प्रतिरोधी टीबी के प्रबंधन में मदद मिल सकती है।

 

रिपोर्ट – अंकित श्रीवास्तव 

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