गोपालगंज। जिले के लिए शिक्षा के क्षेत्र में गौरव का अवसर सामने आया है। कुचायकोट राजकीय कन्या मध्य विद्यालय की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है। शिक्षा में नवाचार, बालिका शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता और सीमित संसाधनों में बेहतर शिक्षण व्यवस्था विकसित करने के उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। अब उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
गंडक नदी के आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्थित विद्यालय के सामने पहले कम नामांकन, बच्चों की अनियमित उपस्थिति और ड्रॉपआउट जैसी चुनौतियां थीं। शिक्षिका पुष्पा प्रसाद ने इन समस्याओं को केवल स्कूल तक सीमित न रखते हुए अभिभावकों और स्थानीय समुदाय को भी शिक्षा की प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास किया। उनकी पहल का उद्देश्य बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय से जोड़ना और पढ़ाई को उनके लिए अधिक सहज एवं आनंददायक बनाना रहा।
बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए पुष्पा प्रसाद ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध और कम लागत वाली सामग्री का इस्तेमाल कर विभिन्न टीएलएम (Teaching Learning Material) तैयार किए। फ्लैश कार्ड, कठपुतली, रोल प्ले और गतिविधि आधारित शिक्षण जैसी विधियों के जरिए कठिन विषयों को बच्चों के लिए सरल बनाने का प्रयास किया गया।
शिक्षिका ने पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के साथ तकनीक को भी जोड़ा। वर्चुअल रियलिटी और 3D वीडियो के माध्यम से बच्चों को ऐसे विषय समझाने की कोशिश की गई, जिन्हें केवल किताबों के जरिए समझना उनके लिए कठिन हो सकता था।विद्यालय परिसर में पेड़ों पर QR कोड आधारित लर्निंग सिस्टम विकसित करना भी उनकी नवाचारी पहल का हिस्सा रहा।
बच्चों की पढ़ाई में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए WhatsApp समूह बनाए गए। कक्षा में होने वाली गतिविधियों की तस्वीरें और वीडियो अभिभावकों के साथ साझा किए गए, ताकि वे बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और स्कूल की गतिविधियों से लगातार जुड़े रहें। इसके अलावा नियमित अभिभावक-शिक्षक बैठक, नामांकन अभियान और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए विद्यालय और समाज के बीच बेहतर समन्वय बनाने का प्रयास किया गया।
पुष्पा प्रसाद ने छात्राओं की शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता को भी प्राथमिकता दी। मासिक स्वच्छता जागरूकता अभियान और Pad Bank जैसी पहल के जरिए छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया गया। विद्यालय स्तर पर स्वच्छता, नशा मुक्ति और बाल विवाह रोकथाम जैसे सामाजिक जागरूकता अभियानों को भी बढ़ावा दिया गया।
समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को ध्यान में रखते हुए ब्रेल लिपि में शिक्षण सामग्री तैयार की गई। इससे ऐसे बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने की कोशिश की गई। वहीं विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विद्यालय में ‘उत्साह बोर्ड’ बनाया गया है। बताया गया है कि अब तक 50 से अधिक बच्चों को इस बोर्ड पर स्थान मिल चुका है।
शिक्षिका पुष्पा प्रसाद को शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए इससे पहले भी कई सम्मान मिल चुके हैं। इनमें बिहार सरकार का राजकीय शिक्षक सम्मान-2024, ‘Teacher of the Month’, निपुण शिक्षक सम्मान और उत्कृष्ट सेवा सम्मान शामिल हैं। राज्य स्तरीय निपुण टीएलएम मेले में भी उनके प्रयासों को पहचान मिली है।
पुष्पा प्रसाद की उपलब्धि यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार, मेहनत और सामुदायिक भागीदारी के जरिए सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए उनका चयन गोपालगंज के शिक्षा जगत के साथ-साथ पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त करना उनकी वर्षों की मेहनत और समर्पण को राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा।