बड़वानी। त्योहारों का मौसम शुरू होते ही रसोई का बजट एक बार फिर प्रभावित होने लगा है। मिठाई, प्रसाद और घरेलू पकवानों में इस्तेमाल होने वाली शकर के दाम में तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक बड़वानी के बाजार में शकर का खुदरा भाव 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। देशभर में भी अगस्त के दौरान शकर की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है और त्योहारों से पहले मांग बढ़ने के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
स्थानीय किराना कारोबारियों के अनुसार, अगस्त की शुरुआत में जिस शकर का भाव करीब 42 से 45 रुपए किलो के आसपास था, वह अब खुदरा बाजार में 70 रुपए तक पहुंच गया है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले करीब 20 दिनों में कीमत में लगभग 18 से 22 रुपए प्रति किलो तक का अंतर आया है।
किराना व्यापारी कमल गोले के अनुसार, 1 अगस्त से 19 अगस्त के बीच कीमतों में लगभग 18 रुपए प्रति किलो की वृद्धि हुई। उनके मुताबिक थोक बाजार में भी भाव बढ़कर करीब 60 से 65 रुपए किलो के स्तर पर पहुंच गया है।
व्यापारी विजय गुप्ता ने बताया कि अचानक कीमत बढ़ने के कारण बाजार में ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हुई है। कई ग्राहक भाव पूछने के बाद कम मात्रा में सामान खरीद रहे हैं या खरीदारी टाल रहे हैं। त्योहारों के दौरान ड्राई फ्रूट और मिठाई से जुड़े सामानों की मांग बढ़ती है, लेकिन महंगाई के कारण बाजार में अपेक्षित रौनक नहीं दिखाई दे रही है।
व्यापारियों का कहना है कि खुदरा दुकानदार अपनी मर्जी से शकर के दाम तय नहीं करते। जिस कीमत पर थोक बाजार से माल मिलता है, उसमें परिवहन और अन्य खर्च जोड़कर ग्राहकों को शकर बेची जाती है। ऐसे में थोक भाव में कमी आने पर खुदरा बाजार में भी राहत मिलने की उम्मीद है।
शकर के अलावा गुड़ के दाम में भी तेजी दर्ज की गई है। कारोबारियों के अनुसार कुछ दिन पहले 50 से 52 रुपए किलो के आसपास बिकने वाला गुड़ अब करीब 60 से 62 रुपए किलो तक पहुंच गया है। इससे त्योहारों में घर पर मिठाई और पारंपरिक पकवान बनाने वाले परिवारों का खर्च और बढ़ गया है।
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, गन्ने की फसल पर मौसम का असर और कम बारिश कीमतों में तेजी की एक वजह हो सकती है। इसके अलावा सीजन के अंतिम दौर में उपलब्ध स्टॉक घटने और त्योहारों से पहले मांग बढ़ने से भी बाजार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, एथेनॉल उत्पादन को शकर की मौजूदा महंगाई का कारण बताए जाने पर केंद्र सरकार ने हाल में इससे असहमति जताई है और कीमत बढ़ने के पीछे कम उत्पादन को प्रमुख वजह बताया है।
गृहिणी सपना जैन ने कहा कि त्योहारों के समय घर पर लड्डू और अन्य मिठाइयां बनाने की परंपरा रही है, लेकिन शकर के दाम बढ़ने से अब परिवारों को मात्रा कम करने पर विचार करना पड़ रहा है। उन्होंने महंगाई को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पहले से ही आटा, दाल, तेल और सब्जियों जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं का खर्च बढ़ा हुआ है। ऐसे में शकर के दाम में अचानक वृद्धि से घरेलू बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।
शकर की कीमत बढ़ने का असर चाय दुकानदारों पर भी पड़ रहा है। चाय व्यवसाय से जुड़े महेश धनगर ने बताया कि शकर के साथ दूध और चायपत्ती की लागत भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि शकर के भाव में स्थिरता नहीं आती है तो लागत निकालने के लिए चाय की कीमत में एक-दो रुपए तक की बढ़ोतरी करने की जरूरत पड़ सकती है।
उपभोक्ताओं ने त्योहारों के दौरान शकर की कीमतों पर निगरानी रखने की मांग की है। उनका कहना है कि थोक और खुदरा बाजार में कीमतों की नियमित जांच होनी चाहिए तथा जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगनी चाहिए। देश स्तर पर भी सरकार ने शकर की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं। केंद्र ने हाल ही में 10 लाख टन कच्ची शकर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है और बड़े थोक उपभोक्ताओं के स्टॉक पर भी सीमा लगाई है।