जैसा की आशंका जताई जा रही थी कि अगर कोरोना वाइरस पर समय रहते काबू नहीं पाया गया और चीन के दूसरे देशों के साथ होने वाली सप्लाई अगर बाधित होती है तो दुनिया भर के बाज़ारों में हाहाकार मच सकता है और ऐसा होने की शुरुआत हो गयी है।
दरअसल 1 फरवरी को बजट पेश होने के बाद शेयर मार्केट में 10 साल की सबसे बड़ी गिरावट हुई लेकिन सबको इस बात का अंदाज़ा था की ये ज्यादा दिन रहने वाला नहीं है और ऐसा हुआ भी, कुछ दिनों बाद मार्केट रिकवर हुआ लेकिन जैसे ही यह खबरे आने लगी की अब बस कुछ ही महीनों का स्टॉक पड़ा है और चीन अभी भी इस वाइरस का कोई तोड़ नहीं निकाल पाया है बाज़ार में गिरावट आनी शुरू हो गयी है।

कोरोना वाइरस के कारण भारत का इस कदर बुरा हाल है की एशिया की सबसे बड़ी टेक्निकल मंडी कहे जाने वाले नेहरू पैलेस में सिर्फ 1 महीने एक स्टॉक बचा है। मूडीज एनालिटिक्स का मानना है कि अगर कोरोना वायरस एक महामारी का रूप लेता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के घेरे में आ सकती है. इनका कहना है की चीन का संकट अब चीन का नहीं बल्कि पूरी दुनिया का है।
भारतीय बाज़ारों में आगे भी गिरावट की आशंका जताई जा रही है और इसका कारण एक तो चीन के साथ ट्रेड में रूकावट वही जीडीपी अनुमान में गिरावट है। ताजा जारी हुए अनुमान के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है.
फिलहाल शेयर बाज़ार 40 हज़ार के मनोवैज्ञानिक आकंड़े के नीचे काम कर रहा है और आज भी इसमें 300 से अधिक अंकों की गिरावट आयी थी।