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Railway Safety : रेल सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव, मथुरा-कोटा सेक्शन पर लागू हुआ स्वदेशी कवच 4.0

Railway Safety : भारतीय रेल ने देश में रेल सुरक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली-मुंबई के हाई डेंसिटी रूट पर स्थित मथुरा-कोटा सेक्शन पर देशी तकनीक से विकसित रेलवे सुरक्षा प्रणाली कवच 4.0 को कमीशन किया है।

By: RNI Hindi Desk 
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Railway Safety : रेल सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव, मथुरा-कोटा सेक्शन पर लागू हुआ स्वदेशी कवच 4.0

Railway Safety : भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली-मुंबई मार्ग के मथुरा-कोटा सेक्शन पर स्वदेशी तकनीक से विकसित कवच 4.0 प्रणाली को कमीशन किया है। यह प्रणाली ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत पूरी तरह भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों द्वारा डिज़ाइन, विकसित और निर्मित की गई है। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, जहां विकसित देशों को ऐसी प्रणाली विकसित करने में दशकों लगे, भारत ने इसे कुछ ही वर्षों में तैयार कर लागू कर दिया, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

कवच एक अत्याधुनिक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो दुर्घटनाओं को रोकने, गति नियंत्रण, और लोको पायलट को दृश्यता कम होने की स्थिति में भी सही निर्णय लेने में सक्षम बनाता है। यह सिस्टम Safety Integrity Level 4 (SIL-4) पर आधारित है, जो वैश्विक मानकों के अनुसार सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी है।

कवच की तकनीकी जटिलता और गहराई इसे एक बहुआयामी प्रणाली बनाती है जिसमें RFID टैग्स, टेलीकॉम टावर्स, लोको कवच, स्टेशन कवच, ऑप्टिकल फाइबर केबल्स और सिग्नलिंग सिस्टम एकीकृत होते हैं। इन सभी घटकों को बिना रेल संचालन बाधित किए सफलतापूर्वक स्थापित किया जा रहा है।

अब तक कवच 4.0 की प्रगति निम्नलिखित है
5,856 किमी ऑप्टिकल फाइबर बिछाई गई, 619 टेलीकॉम टावर स्थापित,
708 स्टेशनों पर कवच लगाया गया,1,107 लोकोमोटिव्स पर कवच सिस्टम सक्रिय,4,001 रूट किमी पर ट्रैकसाइड इक्विपमेंट लगाए गए |

भारतीय रेलवे ने कवच को भविष्य के इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में शामिल करने के लिए AICTE से मान्यता प्राप्त संस्थानों के साथ साझेदारी भी की है। IRISET द्वारा 30,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
कवच प्रणाली भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता, यात्रियों की सुरक्षा और तेज़, सुरक्षित रेलवे की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है। अगले 6 वर्षों में इसे देशभर के रेलवे नेटवर्क पर लागू किया जाएगा।

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