भोपाल। मध्य प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उनकी जमीन और संपत्तियों से जुड़े वैध दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने स्वामित्व योजना को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण इलाकों में ड्रोन के माध्यम से सर्वे का काम कराया जा चुका है। अब आगे की प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बैठक प्रस्तावित है।
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित संपत्तियों का ड्रोन तकनीक से सर्वे किया गया है। इसका उद्देश्य संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार कर संबंधित लोगों को उनके स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराना है। मंत्री के मुताबिक, मुख्यमंत्री की बैठक में सर्वे के बाद की प्रक्रिया और योजना को लागू करने की आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
सरकार करीब 48 लाख से अधिक निजी संपत्तियों और पट्टों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया में लगने वाले पंजीयन शुल्क के साथ पंचायत उपकर और अन्य संबंधित करों का भार भी राज्य सरकार उठाएगी।सरकार के अनुमान के मुताबिक इस पूरी कवायद पर करीब 3,800 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।

स्वामित्व योजना के जरिए ग्रामीणों को उनकी संपत्तियों के आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और लोगों को कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसी दौरान सीधी जिले में एक पटवारी के बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर नदी पार करने से जुड़े वायरल वीडियो पर भी राजस्व मंत्री से सवाल किया गया। मंत्री ने कहा कि यदि नदी में बाढ़ जैसी स्थिति रही होगी तो संभव है कि पटवारी को नदी पार करने में मदद की जरूरत पड़ी हो। हालांकि उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी बुजुर्ग व्यक्ति के लिए अपनी पीठ पर एक जवान व्यक्ति को बैठाकर नदी पार कराना कितना संभव है, यह भी विचार करने वाली बात है।
स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे के बाद अब सरकार की अगली कार्ययोजना मुख्यमंत्री की बैठक में तय होने की उम्मीद है। यदि प्रस्तावित योजना आगे बढ़ती है तो प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को अपनी निजी संपत्तियों और पट्टों से जुड़े वैध दस्तावेज मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।