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एम्बुलेंस का टायर फटा, ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज डेढ़ घंटे जंगल में फंसा

पन्ना जिले में अजयगढ़ से जिला अस्पताल जा रही एम्बुलेंस का टायर फटने से गंभीर मरीज, परिजन और स्टाफ डेढ़ घंटे तक जंगल में फंसे रहे। एम्बुलेंस में स्टेपनी तक नहीं थी।

By: BS Yadav 
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एम्बुलेंस का टायर फटा, ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज डेढ़ घंटे जंगल में फंसा

पन्ना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। अजयगढ़ से गंभीर मरीज को जिला अस्पताल लेकर आ रही एक एम्बुलेंस का टायर खजुरी मोड़ के पास अचानक फट गया, जिससे ऑक्सीजन सपोर्ट पर मौजूद मरीज, उसके परिजन और एम्बुलेंस स्टाफ करीब डेढ़ घंटे तक जंगल के बीच फंसे रहे। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं और एम्बुलेंस संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के अनुसार अजयगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक गंभीर मरीज को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल पन्ना रेफर किया गया था। मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ एम्बुलेंस से जिला अस्पताल लाया जा रहा था। इसी दौरान जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर खजुरी मोड़ के पास एम्बुलेंस का टायर अचानक फट गया।

जंगल में फंसे मरीज और परिजन

दोपहर के समय हुई इस घटना के बाद मरीज, उसके परिजन और एम्बुलेंस कर्मचारी घने जंगल के बीच फंस गए। भीषण गर्मी और उमस के कारण मरीज की हालत और बिगड़ने की आशंका बनी रही। आसपास जंगल होने के कारण जंगली जानवरों का भी खतरा बना हुआ था।सबसे चिंताजनक बात यह रही कि एम्बुलेंस में स्टेपनी (अतिरिक्त टायर) उपलब्ध नहीं थी। साथ ही वाहन में एयर कंडीशनिंग जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं थी, जिससे मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

आशा कार्यकर्ता ने बताई पूरी घटना

मरीज के साथ मौजूद आशा कार्यकर्ता ने बताया कि मरीज लंबे समय से बुखार से पीड़ित था। हालत गंभीर होने पर उसे अजयगढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया था, लेकिन रास्ते में एम्बुलेंस खराब हो जाने से मरीज को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।करीब डेढ़ घंटे बाद पन्ना से दूसरी एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, जिसके बाद मरीज को जिला अस्पताल ले जाया जा सका।

एम्बुलेंस चालक ने लगाए गंभीर आरोप

घटना के बाद एम्बुलेंस चालक ने भी स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। चालक का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन को पुराने और जर्जर टायरों को बदलने के लिए अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।चालक के अनुसार जिले में संचालित कई एम्बुलेंसें पुराने और घिसे हुए टायरों के सहारे चल रही हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस घटना के बाद जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि जब जीवनरक्षक एम्बुलेंसों में ही आवश्यक संसाधनों और सुरक्षा मानकों का अभाव है, तो मरीजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति में तत्काल सुधार की मांग की है।

राजेश रावत की रिपोर्ट

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