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एमएमएमयूटी के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा संदेश, शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण और व्यवस्थाओं में सुधार पर दिया जोर

गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। उन्होंने शिक्षा, चरित्र निर्माण, महिला सशक्तिकरण और नशा मुक्ति पर जोर देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को तीन महीने के भीतर व्यवस्थागत कमियां दूर करने के निर्देश दिए।

By: Nivedita 
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एमएमएमयूटी के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा संदेश, शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण और व्यवस्थाओं में सुधार पर दिया जोर

गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) के 11वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियां और पदक प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा के व्यापक उद्देश्य पर अपने विचार साझा किए।

शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, जिम्मेदार नागरिक बनाना

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो चरित्रवान, राष्ट्रभक्त और समाज के प्रति जिम्मेदार हों। उन्होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के आदर्शों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और तकनीकी कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।

 

एमएमएमयूटी के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा संदेश, शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण और व्यवस्थाओं में सुधार पर दिया जोर

छात्राओं की उपलब्धि को बताया प्रेरणादायक

राज्यपाल ने इस वर्ष गोल्ड मेडल विजेताओं में छात्राओं की उल्लेखनीय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि पदक प्राप्त करने वालों में लगभग 60 प्रतिशत छात्राएं हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत है। उन्होंने परिवार में दादा-दादी और बुजुर्गों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संस्कारों की पहली पाठशाला परिवार होता है।

आत्मनिर्भरता और सामाजिक मूल्यों पर दिया बल

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल भी सीखने चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भरता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए परिवार, समाज और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की।

‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ अभियान से जुड़ने का आह्वान

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाले 100 सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है और शिक्षण संस्थानों को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

 

विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल

दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण भी किया। उन्होंने छात्रों की संख्या के अनुरूप शौचालयों की कमी, पुस्तकालय के सीमित समय, स्वास्थ्य केंद्र, मशीन वर्कशॉप, डे-स्कॉलर क्लब और परिसर की साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता जताई। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को तीन महीने के भीतर इन कमियों को दूर कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

मेधावी विद्यार्थियों ने साझा किए अपने अनुभव

समारोह में सम्मानित विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और कठिन परिश्रम को दिया। छात्रों ने कहा कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग से ही यह उपलब्धि संभव हो सकी।

शिक्षा और व्यवस्था सुधार का मिला स्पष्ट संदेश

11वें दीक्षांत समारोह के माध्यम से राज्यपाल ने शिक्षा की गुणवत्ता, नैतिक मूल्यों, सामाजिक दायित्व और संस्थागत सुधार जैसे विषयों पर स्पष्ट संदेश दिया। अब विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने निर्धारित समय सीमा में आवश्यक सुधार लागू करने की चुनौती होगी।

 

रिपोर्ट – अंकित श्रीवास्तव 

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