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बैतूल में नगर निगम सीमा विस्तार का विरोध तेज, ढोक्या-पाढर के ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पर किया प्रदर्शन

बैतूल के ढोक्या पाढर और पाढर खुर्द गांवों के ग्रामीणों ने नगर निगम में विलय के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने बिना ग्रामसभा की सहमति प्रस्ताव पारित करने का आरोप लगाते हुए इसे निरस्त करने और अलग ग्राम पंचायत या निकटवर्ती पंचायत में शामिल करने की मांग की।

By: Nivedita 
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बैतूल में नगर निगम सीमा विस्तार का विरोध तेज, ढोक्या-पाढर के ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पर किया प्रदर्शन

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में नगर निगम सीमा विस्तार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जिला मुख्यालय से जुड़े ढोक्या पाढर और पाढर खुर्द गांवों के ग्रामीणों ने नगर निगम में शामिल किए जाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

ग्रामसभा की सहमति के बिना प्रस्ताव पारित करने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत डहरगांव ने बिना ग्रामसभा की अनुमति, बिना पूर्व सूचना और बिना स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए नगर निगम में विलय का प्रस्ताव पारित कर दिया। उनका कहना है कि इस निर्णय में ग्रामीणों की राय नहीं ली गई, जिससे क्षेत्र में असंतोष व्याप्त है।

दूरी और आवागमन की समस्या का उठाया मुद्दा

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि ढोक्या पाढर और पाढर खुर्द बैतूल शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित हैं। वहीं माचना नदी पर बने गढ़ा डैम में जलभराव के कारण पंचायत मुख्यालय तक पहुंचना भी कठिन हो गया है। ऐसे में प्रशासनिक कार्यों के लिए लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

 

अलग ग्राम पंचायत या निकटवर्ती पंचायत में शामिल करने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि नगर निगम में विलय का प्रस्ताव तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही ढोक्या पाढर और पाढर खुर्द को अलग ग्राम पंचायत का दर्जा देने या किसी निकटवर्ती ग्राम पंचायत में शामिल करने पर विचार किया जाए, ताकि लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं आसानी से मिल सकें।

चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा आंदोलन

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और जनभावनाओं की अनदेखी की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि बिना स्थानीय सहमति के किसी भी प्रशासनिक निर्णय को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

 

रिपोर्ट – कमलाकर तायवाड़े

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