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बिना हिजाब मॉडल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया फोटो तो आतंकियों ने किया किडनैप, अब मंडरा रहा वर्जिनिटी टेस्ट का खतरा…

By: Amit ranjan 
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बिना हिजाब मॉडल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया फोटो तो आतंकियों ने किया किडनैप, अब मंडरा रहा वर्जिनिटी टेस्ट का खतरा…

नई दिल्ली : बीस वर्षीय मॉडल यमनी इंतिसार अल-हम्मादी ने बिना हिजाब फोटो खिंचकर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। जिसके बाद उन्हें ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने अगवा कर लिया और अब ऐसी खबर आ रही है कि ये विद्रोही इस मॉडल का वर्जिनिटी टेस्ट कर सकते है। जिसके आड़ में वे उसे बहुत प्रताड़ित और टॉर्चर कर सकते है। बता दें कि यह आशंका एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई है।

रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में एमनेस्टी इंटरनेशनल के हवाले से इसके बारे में जानकारी दी है। जिसमें एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि हिजाब के बिना तस्वीरें खिंचवाने को लेकर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा अगवा की गई 20-वर्षीय मॉडल का जबरन वर्जिनिटी टेस्ट कराया जा सकता है।

दरअसल, बीस वर्षीय मॉडल यमनी इंतिसार अल-हम्मादी को 20 फरवरी में राजधानी सना में एक चेकपॉइंट पर गिरफ्तार किया गया था, जो हूती विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित है। हिरासत में लिए जाने के दौरान, उनकी आंखें बंद करके उसके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक मॉडल पर दबाव बनाकर कई अपराधों के लिए ‘कबूल’ करने के लिए मजबूर किया गया था।

रॉयटर्स के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने मॉडल पर अश्लील हरकत करने और इस्लामिक सिद्धांतों के खिलाफ जाने का आरोप लगाया था। आरोप में यह बताया गया कि अल-हम्मादी नियमित रूप से सोशल मीडिया पोस्टों सहित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करती थीं, इन्हीं तस्वीरों में मॉडल ने उन सिद्धांतों की अवहेलना की है।

एमनेस्टी ने कहा कि मॉडल के वकील को बुधवार को यह सूचना मिली है कि उसका वर्जिनिटी टेस्ट कराने की योजना चल रही है। हालांकि एमनेस्टी का कहना है कि वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यातना देने के लिए यौन हिंसा का एक रूप है।

अपनी रिपोर्ट में रॉयटर्स ने यह भी लिखा कि इस मामले पर जब हूती विद्रोहियों से बात करने की कोशिश की गई तो उसका जवाब नहीं दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में अगवा मॉडल के वकील से एक बंदूकधारी ने संपर्क किया था और उसे केस छोड़ने की धमकी भी दी गई थी।

गौरतलब है कि हूती विद्रोहियों के पास आधारहीन आरोपों पर लोगों को मनमाने तरीके से हिरासत में लेने का ट्रैक रिकॉर्ड है। आलोचकों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के सदस्यों को चुप कराने या दंडित करने के लिए, साथ ही उन्हें यातना देने के भी कई मामले सामने आ चुके हैं।

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