प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंच गए हैं। वह सबसे पहले श्री जगद्गुरु विश्वराद्य गुरुकुल शतमानोत्सव गए। वहां पर मौजूद लोगों को उन्होंने संबोधित किया और कहा कि, संस्कृति और संस्कृत की संगम स्थली में आप सभी के बीच आना, मेरा लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है। बाबा विश्वनाथ के सानिध्य में, मां गंगा के आंचल में, संत वाणी का साक्षी बनने का अवसर बार-बार नहीं मिलता।
इसके बाद पीएम मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल पहुंचे। वहां पर उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल का उद्घाटन किया। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय की 63 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि, आज इस क्षेत्र, दीनदयाल जी की स्मृति स्थली का जुड़ना, अपने नाम पड़ाव की सार्थकता को और सशक्त कर रहा है। ऐसा पड़ाव जहां, सेवा, त्याग, विराग और लोकहित सभी एक साथ जुड़कर एक दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित होंगे।
पं. दीनदयाल जी की आत्मा हमें हमेशा प्रेरणा देती रहती है। दीनदयाल उपाध्याय जी ने हमें अंत्योदय का मार्ग दिखाया था। यानि जो समाज की आखिरी पंक्ति में हैं, उसका उदय। 21वीं सदी का भारत, इसी विचार से प्रेरणा लेते हुए अंत्योदय के लिए काम कर रहा है। जो विकास के आखरी पायदान पर है, उसे पहले पायदान पर लाने के लिए काम हो रहा है। चाहे वो पूर्वांचल हो, पूर्वी भारत हो, उत्तर पूर्व हो, देश के 100 से ज्यादा आकांक्षी जिले हों, हर क्षेत्र में विकास के अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।
बीते 5 वर्षों में वाराणसी जनपद में लगभग 25 हज़ार करोड़ रुपये के विकास कार्य या तो पूरे हो चुके हैं, या काम चल रहा है। देवी अहिल्याबाई होलकर के बाद इतने बड़े पैमाने पर काशी नगरी के लिए काम हो रहे हैं, तो उसके पीछे महादेव का ही आशीर्वाद है।