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महिला आरक्षण और परिसीमन पर पीएम मोदी का संदेश

पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ा है, इसलिए इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए।

By: BS Yadav 
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महिला आरक्षण और परिसीमन पर पीएम मोदी का संदेश

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के संसदीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि देश के जीवन में कुछ ऐसे अवसर आते हैं जब समाज की सोच और नेतृत्व की क्षमता मिलकर एक स्थायी धरोहर तैयार करती है, और महिला आरक्षण बिल ऐसा ही एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 25–30 वर्षों में महिला आरक्षण को लेकर जो भी विरोध हुआ, वह समय के साथ खत्म हो गया। उन्होंने बताया कि पंचायत और स्थानीय निकायों में चुनी गई महिलाओं ने अब एक मजबूत राजनीतिक चेतना विकसित कर ली है और वे जमीनी स्तर पर ओपिनियन मेकर बन चुकी हैं। आज महिलाएं केवल मतदान तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि नीति निर्माण में सक्रिय भागीदारी चाहती हैं।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इस मुद्दे में राजनीति देख रहे हैं, उन्हें पिछले वर्षों के चुनावी परिणामों पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के चुनाव में इस विषय पर विवाद इसलिए नहीं हुआ क्योंकि इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था।

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% प्रतिनिधित्व मिलने के बाद वे खुद तय करेंगी कि किन वर्गों को किस प्रकार का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की क्षमता पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए।

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं अति पिछड़े समाज से आते हैं, लेकिन संविधान ने उन्हें सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी दी है। अंत में उन्होंने सभी से अपील की कि इस विषय को राजनीति के तराजू पर न तौला जाए, बल्कि इसे राष्ट्रहित के निर्णय के रूप में देखा जाए।

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