ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाए जाने वाले व्रत निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इसे वर्ष भर की एकादशी में सबसे उत्तम फल देने वाला व्रत माना जाता है।
श्रद्धालु बिना अन्न जल ग्रहण किए हुए इस कठिन व्रत को रखते हैं। इस दिन श्रद्धालु सुबह उठकर गंगा घर जाकर स्नान करते हैं लेकिन लॉक डाउन होने के कारण जिला प्रशासन ने धारा 144 लगा रखा है।
आज के दिन काशी के घाटों पर लाखों श्रद्धालु पूर्वांचल से ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों से काशी आते थे और मां गंगा में डुबकी लगाकर अपने को धन्य समझते थे।
अगर बात काशी की हो तो काशी यूं तो मोक्ष की नगरी मानी जाती है और जो भी श्रद्धालु आते हैं वह अवश्य ही मां गंगा में स्नान कर, दान पुण्य करते हैं।
लेकिन कोरोना ने जिस तरह से दहशत मचा रखी है और वाराणसी में भी इसकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है जिसे देखकर जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है.
जिला प्रशासन ने घाटों पर जाने वाले तमाम रास्ते बंद कर दिए है और लगातार ध्वनि प्रसारण किया जा रहा है कि कोई घाट पर स्नान करने के लिए नहीं जाए ।